सीरिया के संकल्प की जीत और अमरीका के सपने चकनाचूर
अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रान्स सीरिया में अपने लक्ष्यों को पूरा करने में नाकाम हो गए हैं।
सन 1956 में ब्रिटेन, फ़्रान्स और इस्राईल ने मिस्र पर मिल कर हमला किया लेकिन उन्हें विफलता का मुंह देखना पड़ा और वे अपने लक्ष्य हासिल नहीं कर सके। मिस्र में अरब राष्ट्र को विजय मिली और जागरूक राष्ट्र ने राष्ट्रपति जमाल अब्दुन्नासिर का समर्थन किया जो पश्चिम पर निर्भरता के विरोधी और फ़िलिस्तीन के समर्थक थे। इसी के बाद मिस्र अरबों के लिए एक आदर्श बन गया।
एेसी ही घटना अब हमें सीरिया में दिखाई दी। वाॅशिंग्टन, लंदन और पेरिस का त्रिपक्षीय हमला, जो इस्राईल के गुप्तचर सहयोग और फ़ार्स की खाड़ी के कुछ अरब देशों की मदद से हुआ, न केवल यह कि इन तीनों देशों के सामरिक व राजनैतिक लक्ष्यों को व्यवहारिक नहीं बना सका बल्कि साम्राज्य के मुक़ाबले में एक प्रतिरोधक अरब नेता के रूप में बश्शार असद की लोकप्रियता बढ़ने का भी कारण बना। इसी के साथ यह हमला सीरिया की जनता, सेना और सरकार के बीज एकजुटता बढ़ने का भी कारण बना और इसने सीरिया को पश्चिम की साम्राज्यवादी चालों के मुक़ाबले में एक मज़बूत देश में बदल दिया।
अमरीका ने, जिसे 120 देशों का समर्थन हासिल है, हज़ारों सशस्त्र आतंकियों को अत्याधुनिक हथियारों और फ़ार्स की खाड़ी के अरब देशों के आर्थिक समर्थन के साथ सीरिया रवाना किया। सीरिया की सरकार ने जहां अमरीका के लक्ष्यों को व्यवहारिक होने और आतंकियों को जीत हासिल करने से रोका, वहीं आतंकियों की पराजय को रोकने के लिए किए जाने वाले हमले को भी विफल बना दिया।
सीरिया पर तीन पश्चिमी देशों के हमले बुरी तरह से विफल रहे और ये देश अपने दृष्टिगत लक्ष्यों को निशाना नहीं बना सकते। इस्राईली मीडिया ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि इस हमले का परिणाम शून्य रहा है। यह बात इस्राईल में पाई जाने वाली निराशा को भी प्रकट करती है। इस्राईल की ओर से मंगलवार को सीरिया पर फ़ायर किए गए 9 मीज़ाइलों को भी सीरियाई बलों ने हवा में ही नष्ट कर दिया।
अमरीका ने सीरिया पर हमला करके संसार में अपना रौब बाक़ी रखने की कोशिश की थी और इसी तरह उसने इस हमले के माध्यम से अमरीकी जनता का ध्यान ट्रम्प की फ़ज़ीहतों की ओर से हटाना चाहा था लेकिन हुआ इसके विपरीत। सीरिया की सेना ने अमरीका के अति विकसित मीज़ाइलों को मार गिराया जिससे संसार में अमरीका की सैन्य शक्ति पर गहरी चोट लगी है। कहा जा सकता है कि सीरिया पर सैन्य अतिक्रमण में अमरीका की विफलता ने वाॅशिंग्टन की शक्ति के पतन को रोकने की अंतिम कोशिशों को भी नाकाम बना दिया है। अमरीका की हार ने इसी तरह सीरियाई सेना के प्रतिरोध, साहस और योग्यता को भी उजागर कर दिया है।
साभारः नशरा वेबसाइट, लेबनान, लेखः हसन हरदान