इराक़ में अमरीका की सैन्य उपस्थिति का विरोध
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इराक़ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार फ़ालेह फ़य्याज़ ने कहा है कि उनके देश में अमरीका के सैन्य सलाहकारों की उपस्थिति सीमित होनी चाहिए।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr २०, २०१८ ०९:३३ Asia/Kolkata

इराक़ के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार फ़ालेह फ़य्याज़ ने कहा है कि उनके देश में अमरीका के सैन्य सलाहकारों की उपस्थिति सीमित होनी चाहिए।

इराक़ में सद्दाम सरकार के पतन के बाद अमरीका इस देश के आंतरिक मामले में एक प्रभावी विदेशी खिलाड़ी बना हुआ है। वाॅशिंग्टन सद्दाम शासन के बाद इराक़ में लम्बे समय तक अपनी सैन्य उपस्थिति चाहता था लेकिन इराक़ी सरकार, संसद और जनता के विरोध के कारण वर्ष 2011 में उसे अपने सैनिकों की एक बड़ी संख्या को इराक़ से बाहर निकालना पड़ा और उसके केवल तीन हज़ार सैनिक, सैन्य प्रशिक्षण और परामर्श के नाम पर इराक़ में बाक़ी रहे। वर्ष 2014 में तथाकथित दाइश विरोधी गठजोड़ के गठन के बाद अमरीका ने फिर इराक़ में अपने सैनिकों की संख्या में वृद्धि की और स्पूतनीक समाचार एजेंसी के मुताबिक़ तीस सितम्बर 2017 में लगभग 8900 अमरीकी सैनिक इराक़ में थे।

 

इराक़ से आतंकी गुट दाइश का सफ़ाया हो चुका है लेकिन अमरीका अपने सैनिकों को इस देश से नहीं निकालना चाहता। इसका पहला कारण यह है कि इस सैन्य उपस्थिति के माध्यम से वह इराक़ व सीरिया के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करना चाहता है। विशेष कर अगले महीने इराक़ में आयोजित होने वाले संसदीय चुनावों पर प्रभाव डालने की कोशिश में है। दूसरा कारण यह है कि वह इसके माध्यम से मध्यपूर्व में अपने हितों की पूर्ति विशेष कर ईरान व इराक़ के संबंधों में मज़बूती को रोकना चाहता है। यह सब एेसी स्थिति में है कि जब इराक़ की सरकार, संसद और जनता विशेष रूप से धार्मिक नेतृत्व देश की स्वाधीनता पर बल देते हुए इराक़ से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकाले जाने पर बल दे रहा है।  (HN)