लेबनान में संसदीय चुनाव और इस देश का राजनैतिक भविष्य
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लेबनान में 5 साल के बाद 19वीं ससद के लिए रविवार को मतदान हुए।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ०६, २०१८ १२:१९ Asia/Kolkata

लेबनान में 5 साल के बाद 19वीं ससद के लिए रविवार को मतदान हुए।

सभी की निगाहें इस चुनाव के लेबनान के भीतर और बाहर लेबनान के भविष्य सहित क्षेत्र के हालात पर पड़ने वाले प्रभाव पर लगी हुयी हैं। लेबनान के संसदीय चुनाव ऐसे हालात में आयोजित हो रहे हैं कि बहुत से क्षेत्रीय देशों को अशांति व संकट का सामना है।

लेबनान का संसदीय चुनाव यह संदेश दे रहा है कि यह देश अपनी सेना, राष्ट्र और प्रतिरोध की मदद से एक स्थिर देश रहने में सक्षम है और इस देश में प्रजातंत्र है। लेबनान के चुनाव के संबंध में एक अहम बिन्दु यह है कि लेबनान में संसदीय चुनाव उस क़ानून के आधार पर आयोजित हो रहा है जो वर्षों के विचार विमर्श के बाद पारित हुआ। इस क़ानून के अनुसार, उम्मीदवारों के चयन का मानक बहुमत से सापेक्षता में बदल गया है। इसलिए कुछ हद तक ताज़ा चुनावी क़ानून को पहले वाले क़ानून से बेहतर कहा जा सकता है। नए क़ानून में इस बात को मद्देनज़र रखा गया है कि इस देश की संसद में नई फ़ोर्स आए क्योंकि इसमें सापेक्षता को मद्देनज़र रखा गया है और यह विषय समय बीतने के साथ लेबनान के पारंपरिक राजनैतिक माहौल को बदलने की पृष्ठभूमि भी मुहैया कर सकता है।

हालिया वर्षों में लेबनान के हालात यह दर्शाते हैं कि प्रतिरोध को रणक्षेत्र से हटाने की पश्चिमी सरकारों और अरब शासकों सहित विदेशियों की साज़िशें नाकाम रही हैं। यह ऐसी हालत में है कि लेबनान के राजनैतिक मंच पर प्रतिरोध को कमज़ोर करने के लिए  उनकी कार्यवाहियां पहले ही नाकाम रही हैं और वे एक बार फिर लेबनानी राष्ट्र व प्रतिरोध के सामने अपनी एक और नाकामी का नज़ारा कर रहे हैं। (MAQ/T)