इस्राईल पर मिसाइलों की बरसात की रात
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बृहस्पतिवार की सुबह सीरिया की धरती से फ़ायर किए जाने वाले मिसाइल इस्राईल पर बरसे। मिसाइलों के निशाने पर इस्राईल के अवैध क़ब्ज़े वाले गोलान हाइट्स के इलाक़े में मौजूद चार इस्राईली केन्द्रों के दस स्थान थे।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May १०, २०१८ १४:३७ Asia/Kolkata
  • इस्राईल पर मिसाइलों की बरसात की रात

बृहस्पतिवार की सुबह सीरिया की धरती से फ़ायर किए जाने वाले मिसाइल इस्राईल पर बरसे। मिसाइलों के निशाने पर इस्राईल के अवैध क़ब्ज़े वाले गोलान हाइट्स के इलाक़े में मौजूद चार इस्राईली केन्द्रों के दस स्थान थे।

इस हमले से साफ़ हो गया कि इस्राईल और अमरीका से लड़ने वाला मोर्चा जिसकी बागडोर ईरान के हाथ में है इस्राईल के हर हमले का जवाब देने में पूरी तरह सक्षम है।

सीरिया से फ़ायर किए गए अधिकतर मिसाइल अपने लक्ष्यों को भेदने में सफल रहे जिससे साबित हो गया कि इस्राईल की आयरन डोम मिसाइल ढाल व्यवस्था मिसाइल हमले रोकने में पूरी तरह फ़ेल हो गई है। यहीं से यह बात भी साफ़ हो जाती है कि इस्राईल हरगिज़ बड़ा युद्ध करने की हिम्मत नहीं कर पाएगा।

इस मिसाइल हमले से जो भारी नुक़सान पहुंचा है इस्राईल उस पर पर्दा डालने में कामयाब रहा मगर प्राप्त जानकारियों से पता चलता है कि कम से कम 30 इस्राईली सैनिकों को अस्पताल पहुंचाया गया है। यदि यह ख़बरें सही हैं तो नेतनयाहू की सरकार को इसकी बहुत बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ेगी।

इस्राईल को शायद इस हमले की आशा थी इसीलिए इस्राईली सेना के चीफ़ आफ़ स्टाफ़ आइज़नकोट बुधवार की सुबह ही गोलान हाइट्स पहुंच गए थे। इस्राईली मीडिया ने पहले तो इस हमले के लिए ईरान की अलक़ुद्स फ़ोर्स पर आरोप लगाया लेकिन फिर अपने इस दावे से पीछे हट गया। इस्राईल के राजनैतिक गलियारों ने प्रधानमंत्री पर यह सवाल दाग़े हैं कि हम किस तरह जा रहे हैं।

मिसाइल हमलों से पहले नेतनयाहू डींगें मार रहे थे कि ईरान की आवाज़ बहुत ऊंची है लेकिन शक्ति का वर्चस्व हमारे हाथ में है मगर अब पता चला गया है कि इस्राईल पूरी तरह ख़तरे में है और यदि उसने सीरिया पर बार बार हमला किया तो उसकी इसकी क़ीमत भी चुकानी पड़ेगी। इस्राईल इस पीड़ादायक हमले को ख़ामोशी से सहन कर लेगा वह बड़े युद्ध की हिम्मत नहीं करेगा लेकिन यह आख़िरी सैनिक टकराव नहीं होगा बल्कि इसी प्रकार के टकराव आगे भी जारी रहेंगे। इस्राईल की कोशिश होगी कि सीरिया में ईरान की उपस्थिति को अंतर्राष्ट्रीय संकट के रूप में पेश करे और विश्व के अन्य देश आकर इस्राईल को बचाएं जिस तरह इससे पहले कई दशकों से पश्चिमी देश इस्राईल की रक्षा करते आए हैं।

इलाक़े में इस्राईल से टकराव का रूप बदल गया है। अब सऊदी अरब तथा कुछ अन्य देश इस्राईल के ख़िलाफ़ लड़ाई से निकल चुके हैं जबकि अब इस्राईल से मोर्चा लेने वाले गठबंधन में कुछ अरब देश और ईरान शामिल हैं। इतना ही नहीं अब तक सऊदी अरब कोशिश कर रहा है कि अमरीका और इस्राईल का ईरान से युद्ध हो जाए और यह लड़ाई केवल सीरिया में न हो बल्कि तेहरान पर हमला किया जाए। हमारे विचार में रियाज़ की यह तमन्ना कभी भी पूरी नहीं हो पाएगी।

ईरान के पास बहुत सारे विकल्प हैं और उसके हाथ में अफ़ग़ानिस्तान से लेकर इराक़, सीरिया यमन और लेबनान तक पूरे इलाक़े में बहुत से तुरुप के पत्ते मौजूद हैं। उसे कोई बड़ा क्षेत्रीय युद्ध लड़ने की अब ज़रूरत ही नहीं है। वह बहुत आसानी से इस इलाक़े में अमरीका इस्राईल और उनके घटकों की नाक में दम कर सकता है।

कमाल ख़लफ़

वरिष्ठ अरब पत्रकार