अमरीका की ओर से हिज़्बुल्लाह के नेताओं पर प्रतिबंध
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अमरीका ने 16 मई 2018 को हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह और उप महासचिव शैख़ नईम क़ासिम सहित लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के कुछ वरिष्ठ सदस्यों पर नये प्रतिबंध लगा दिए।
(last modified 2023-11-29T05:45:15+00:00 )
May १७, २०१८ ११:४६ Asia/Kolkata

अमरीका ने 16 मई 2018 को हिज़्बुल्लाह के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह और उप महासचिव शैख़ नईम क़ासिम सहित लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के कुछ वरिष्ठ सदस्यों पर नये प्रतिबंध लगा दिए।

अमरीकी वित्तमंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि छह लोगों को वैश्विक आतंकवाद से संबंध होने के आरोप में प्रतिबंधों की सूची में शामिल किया गया। इन छह लोगों में से पांच का संबंध हिज़्बुल्लाह से है। 

यद्यपि अमरीकी सरकार सैयद हसन नसरुल्लाह सहित हिज़्बुल्लाह के सदस्यों और नेताओं पर प्रतिबंध लगा चुकी है किन्तु हिज़्बुल्लाह और प्रतिरोध के मोर्चे के बारे में ट्रम्प प्रशासन की हालिया कार्यवाहियों से पता चलता है कि इसके पीछे कोई और ही लक्ष्य है। 

सबसे पहली बात तो यह है कि लेबनान में संसदीय चुनाव के केवल दस दिन बाद ही हिज़्बुल्लाह के नेताओं और सदस्यों पर प्रतिबंध लगाया गया क्योंकि इस चुनाव में हिज़्बुल्लाह और उसके घटक दलों ने सबसे अधिक 67 सीटों पर जीत दर्ज की। इस बड़ी सफलता का अर्थ यह है कि लेबनान में सत्ता के गठन में हिज़्बुल्लाह और उसके घटक दलों की प्रभावी भूमिका होगी और हिज़्बुल्लाह के वरिष्ठ सदस्यों पर अमरीकी प्रतिबंध, चुनाव परिणामों पर प्रतिक्रिया, चुनाव परिणाम का खुला विरोध और लेबनान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप समझा जा रहा है। 

दूसरी बात यह है कि अमरीका की ओर से यह कार्यवाही, अपने दूतावास के बैतुल मुक़द्दस स्थानांतरित किए जाने के केवल दो दिन बाद ही अंजाम दी गयी।

बहरहाल हिज़्बुल्लाह के विरुद्ध अमरीका की यह कोई पहली कार्यवाही नहीं है और इससे पहले भी अमरीकी हिज़्बुल्लाह और हिज़्बुल्लाह के नेताओं पर प्रतिबंध लगा चुके हैं लेकिन हालिया प्रतिबंध सैयद हसन नसरुल्लाह की धमकी के केवल दो दिन बाद ही लगाया गया है। (AK)