पैरिस और रियाज़ में ठनी
फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैकक्रां ने बयान दिया कि पिछले साल लेबनान के राजनैतक संकट को हल करने में उन्होंने सक्रिया रोल अदा किया।
उन्होंने कहा कि सऊदी अरब ने कई हफ़्ते से लेबनान के प्रधानमंत्री सअद अलहरीरी को गिरफ़तार कर रखा था। मैकक्रां से पूछा गया कि पिछले एक साल में फ़्रांस की विदेश नीति में कुछ उपलब्धियां मिली हैं या नहीं तो इस पर उन्होंने कहा कि मैं याद दिलाना चाहता हूं कि लेबनान के प्रधानमंत्री सअद अलहरीरी को कई हफ़्ते तक सऊदी अरब में गिरफ़तार करके रखा गया था।
मैकक्रां के बयान पर सऊदी अरब की सरकार का आक्रोश सावतें आसमान पर पहुंच गया है। क्योंकि सऊदी अरब बार बार कहता रहा है कि सअद अलहरीरी को गिरफ़तार नहीं किया गया था। सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी वास ने मंगलवार को विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी के हवाले से लिखा कि मैकक्रां झूठ बोल रहे हैं सऊदी अरब ने हमेशा लेबनान की शांति व सुरक्षा तथा ख़ुद प्रधानमंत्री सअद अलहरीरी का समर्थन किया है।
सऊदी अरब लाख खंडन करे लेकिन फ़्रांसीसी राष्ट्रपति के बयान को सही माना जा रहा है क्योंकि पहले से ही विभिन्न गलियारों ने यह कही थी कि सऊदी अरब ने सअद अलहरीरी को गिरफ़तार करके रखा था।
सऊदी अरब ने गत 4 नवम्बर 2017 को लेबनान के प्रधानमंत्री सअद अलहरीरी को रियाज़ बुलाया और वहां उनसे ज़बरदस्ती त्यागपत्र दिलवा दिया और अलहरीरी को गिरफ़तार कर लिया ताकि लेबनान में राजनैतिक संकट पैदा हो जाए। सऊदी अधिकारी यह धारणा पैदा करना चाहते थे कि सअद अलहरीरी के त्यागपत्र का असली कारण हिज़्बुल्लाह आंदोलन है। मगर इस पूरे प्रकरण में हिज़्बुल्लाह और लेबनान के अधिकारियों की जो प्रतिक्रिया सामने आई उसने सऊदी अरब की सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया और रियाज़ सरकार को इस मामले में बदनामी झेलनी पड़ी।
लेबनान के राष्ट्रपति मिशल औन ने सऊदी अरब के प्रभारी राजदूत को तलब करके कहा कि सअद अलहरीरी का रियाज़ जाकर त्यागपत्र देना बहुत संदिग्ध है। सअद अलहरीरी को चाहिए कि तत्काल लेबनान लौटें और अपने त्यागपत्र के बारे में स्पष्टीकरण दें।
फ़्रांस के राष्ट्रपति ने रियाज़ का दौरा करके सअद अलहरीरी को बचाने के साथ ही सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान को भी बचा लिया जो लेबनानी प्रधानमंत्री से त्यागपत्र लेकर सऊदी अरब को गंभीर कूटनैतिक संकट में फंसाने जा रहे थे। अब इसी मुद्दे पर फ़्रांस और सऊदी अरब में नया विवाद छिड़ गया है।