फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध ने इस्राईल को किया युद्ध विराम पर मजबूर
इस्राईल के क़ब्ज़े वाले इलाक़ों पर हमास के 2014 के युद्ध के बाद से सबसे भीषण मिसाइल हमलों ने इस्राईल को युद्ध विराम पर मजबूर कर दिया है।
इस्राईली सेना ने पिछले 12 वर्षों से ग़ज्ज़ा की ज़मीनी, हवाई और समुद्री घेराबंदी कर रखी है, जहां लोग भूख और दवाईयों एवं उपचार के अभाव में मर रहे हैं। केवल इतना ही नहीं वतन वापसी नामक शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान, इस्राईली सैनिकों ने 150 से अधिक फ़िलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया और हज़ारों को घायल कर दिया।
फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधी संगठनों के हमलों के जवाब में इस्राईल ने ग़ज्ज़ा पर भयानक हवाई हमले किए हैं, इसके बावजूद अमरीकी प्रतिनिधि निकी हेली ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से मांग की है कि "इस्राईल के निर्दोष नागरिकों के ख़िलाफ़ ताज़ा हमलों का कड़ा जवाब दिया जाना चाहिए।"
अमरीका फ़िलिस्तीनियों पर इस्राईल के अत्याचारों और उनके जातीय सफ़ाए का सबसे बड़ा समर्थक रहा है और अवैध रूप से फ़िलिस्तीनियों के घरों और ज़मीनों पर बसाए गए ज़ायोनियों को अमरीकी अधिकारी निर्दोष क़रार देते रहे हैं, लेकिन निहत्थे और पीड़ित फ़िलिस्तीनियों पर होने वाले अत्याचारों से उन्हें कोई लेना नहीं है।
अमरीकियों के इसी दोहरे मापदंड ने मध्यपूर्व और विश्व में हिंसा एवं आतंकवाद को बढ़ावा दिया है, जो आगे चलकर तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकता है।
ग़ज्ज़ा में ताज़ा हिंसा उस समय भड़क उठी जब इस्राईली सैनिकों ने ग़ज्ज़ा की सीमा पर एक फ़िलिस्तीनी को गोली मारकर शहीद कर दिया, इससे दो दिन पहले ही इस्राईली टैंक ने जेहादे इस्लामी से संबंध रखने वाले तीन फ़िलिस्तीनियों को उड़ा दिया था।
गुरुवार को जेहादे इस्लामी संगठन के एक नेता ने कहा था, जब तक अतिक्रमण जारी रहेगा, प्रतिरोधी संगठनों को फ़िलिस्तीनियों की रक्षा का अधिकार हासिल रहेगा।
ख़ालिद अल-बत्श ने कहा, इस्राईल अपना अतिक्रमण जारी रखे हुए है, इसलिए हमारे सामने दो ही विकल्प हैं, विशाल प्रदर्शन और ज़ायोनियों के हमलों के मुक़ाबले में प्रतिरोध।
विशेषज्ञों का मानना है कि फ़िलिस्तीनियों का प्रतिरोध और उनकी तपस्या रंग ला रही है और इस्राईली जो कभी उन्हें इंसानों का दर्जा देने के लिए तैयार नहीं थे, उनके साथ युद्ध विराम करने पर मजबूर हैं। msm