सुरक्षा परिषद में अमरीका को फिर मिली पराजय
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ज़ायोनी शासन के समर्थन और फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ता गुटों की निंदा पर आधारित सुरक्षा परिषद में अमरीका का मसौदा रद्द हो गया।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun ०२, २०१८ १०:३५ Asia/Kolkata
  • सुरक्षा परिषद में अमरीका को फिर मिली पराजय

ज़ायोनी शासन के समर्थन और फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ता गुटों की निंदा पर आधारित सुरक्षा परिषद में अमरीका का मसौदा रद्द हो गया।

अमरीका ने यह प्रस्ताव ग़ज़्ज़ा से इस्राईल की ओर फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ताओं द्वारा मीज़ाइल फ़ायर किए जाने की निंदा में पेश किया जिसके विरोध में कुवैत, रुस और बूलिविया ने मतदान किया जबकि 11 देश तटस्थ रहे और केवल अमरीका ने ही इस मसौदे के समर्थन में मतदान किया। इस प्रकार से ज़ायोनी शासन के समर्थन में अमरीका का यह मसौदा फ़ेल हो गया।

अमरीका की ओर से पेश किया गया प्रस्ताव का यह मसौदा एेसी स्थिति में रद्द हो गया कि इससे पहले कुवैत ने सुरक्षा परिषद में फ़िलिस्तीनी राष्ट्र के समर्थन में एक मसौदा पेश किया था जिसको अमरीका ने वीटो कर दिया।

संयुक्त राष्ट्र संघ में कुवैत के प्रतिनिधि नासिर अलओतैबी इस बारे में कहते हैं कि अपनी ज़िम्मेदारियों के निर्वहन में सुरक्षा परिषद की अक्षमता के कारण अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन की स्थिति और भी संकटमयी हो गयी है। 

वापसी मार्च पर ज़ायोनी सैनिकों के हमलों में अब तक 120 फ़िलिस्तीनी शहीद और हज़ारों अन्य घायल हो चुके हैं। अतिग्रहणकारी ज़ायोनी सैनिकों ने मंगलवार को ग़ज़्ज़ा के उत्तरी क्षेत्रों पर गोलाबारी की। इस हमले में एक फ़िलिस्तीनी शहीद और एक अन्य घायल हो गया। शनिवार की रात भी ज़ायोनी सैनिकों के युद्धक विमानों ने ग़ज़्ज़ा के क्षेत्र पर हमला किया था। 

ग़ौरतलब है कि 14 मई को इस्राईली सैनिकों ने ग़ज्ज़ा की सीमा पर सीधे फ़िलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों पर फ़ायरिंग करके 62 से अधिक प्रदर्शनकारियों को मौत के घाट उतार दिया था।  

इस्राईली सैनिकों की फ़ायरिंग में क़रीब 3000 प्रदर्शनकारी घायल भी हुए थे, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है और ग़ज्ज़ा की घेराबंदी की वजह से उनका उचित उपचार भी नहीं हो पा रहा है। (AK)