बहरैन, शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन में व्यापक प्रदर्शन
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बहरैनी जनता ने एक बार फिर देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन करके वरिष्ठ शीया धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन और उन्हें तुरंत रिहा किए जाने की मांग की है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul ०९, २०१८ ०७:२३ Asia/Kolkata
  • बहरैन, शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन में व्यापक प्रदर्शन

बहरैनी जनता ने एक बार फिर देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन करके वरिष्ठ शीया धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम के समर्थन और उन्हें तुरंत रिहा किए जाने की मांग की है।

फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार बहरैनी जनता ने रविवार की रात देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन किए और आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध नारे लगाते हुए अपने देश के धार्मिक नेता आयतुल्लाह शैख़ ईसा क़ासिम के भरपूर समर्थन की घोषणा की है।

प्रदर्शनकारियों ने इसी प्रकार आले ख़लीफ़ा शासन के विरुद्ध नारे लगाते हुए आयतुल्लाह शैख़ ईसा क़ासिम की शारीरिक स्थिति के बिगड़ने का आरोप प्रशासन पर लगाया।

बहरैनी प्रशासन ने आयतुल्लाह शैख़ ईसा क़ासिम की नागरिकता रद्द करते हुए उन्हें जून 2016 से घर में नज़र बंद कर रखा है और तब से लेकर अब तक उनके घर पर सख़्त पहरा है। 

नज़रबंदी के दौरान वरिष्ठ शीया धर्मगुरु शैख़ ईसा क़ासिम की हालत और अधिक ख़राब हो गयी जिसके बाद बहरैनी प्रशासन ने डाक्टर के परामर्श के बाद उन्हें उपचार के लिए विदेश भेजने की अनुमति दे दी है।

ज्ञात रहे कि बहरैन के न्यायालय ने निराधार आरोप के आधार पर वरिष्ठ धर्मगुरू शैख ईसा क़ासिम को एक साल की सज़ा सुनाते हुए उनकी संपत्ति को ज़ब्त करने का भी आदेश दिया था।  न्यायालय के इस आदेश के बाद बहरैनी सुरक्षाबलों ने इस देश की राजधानी मनामा के अद्दुराज़ क्षेत्र में शैख़ ईसा क़ासिम के घर पर हमला कर दिया था जिसमें कम से कम 6 लोग मारे गए और 200 से अधिक घायल हो गए।  इस संबन्ध में सुरक्षाबलों ने लगभग 300 लोगों को गिरफ़्तार किया है।

उल्लेखनीय है कि 14 फ़रवरी वर्ष 2011 से बहरैन में जनता ने आले ख़लीफ़ की तानाशाही सरकार के ख़िलाफ़ आंदोलन शुरू कर रखा है। सरकार ने जनता के विरोध को दबाने के लिए बड़ी संख्या में नेताओं और धर्मगुरुओं को जेल में बंद कर दिया है और उन पर झूठे मुक़द्दमे चला कर उन्हें लम्बी लम्बी सज़ाएं सुनाई हैं। (AK)