बिखरे हुए अंग, टूटे हुए सपने
जब रायद जदल्लाह अपने सर्फ़बोर्ड पर खड़े होकर भूमध्य सागर की लहरों पर सवार होते थे, तो वह कुछ क्षणों के लिए ही सही ख़ुद पर लगे बंधनों और सीमाओं के उस पार झांकने में सक्षम होते थे, क्योंकि वह एक फ़िलिस्तीनी हैं, जिनका जीवन परिवेष्ट और घेराबंदी का शिकार गज़्ज़ा पट्टी में बीत रहा है।
26 वर्षीय सर्फ़र ने बंदिशों के इन लम्हों से कुछ क्षण चुराकर लहरों की सवारी का आनंद लिया, जो अब उनके लिए सिर्फ़ पुरानी यादगार बनकर रह गया है।
जदल्लाह कहते हैं, "जब मैं सर्फ़ करता था तो सबकुछ भूल जाता था, ऐसा एहसास होता था कि मानो आप किसी और दुनिया में हैं, जहां न ही कोई युद्ध है और न ही घेराबंदी। उस समय मेरे मन में सिर्फ़ यह होता था कि किसी तरह आने वाली दूसरी लहर की सवारी करूं।
जदल्लाह की उमंगों पर उस समय पानी फिर गया जब 6 अप्रैल को महा वापसी रैली में शांतिपूर्ण रूप से भाग लेते हुए एक इस्राईली स्नाइपर की गोली उनकी टांग पर लगी।
30 मार्च से शुरू होने वाले वापसी मार्च में फ़िलिस्तीनी प्रदर्शनकारी ग़ज्ज़ा पट्टी पर इस्राईल के 11 वर्ष पुराने परिवेष्टन की समाप्ति की मांग कर रहे थे।
जदल्लाह गज्ज़ा सीमा पर लगी बाड़ से क़रीब 150 मीटर की दूरी पर खड़े हुए थे, जब एक गोली आकर उनकी रान में लगी।
उनका कहना है कि मैं प्रदर्शनों में भाग नहीं ले रहा था। मैं सिर्फ़ प्रदर्शनकारियों को देख रहा था, उसी समय अचानक मेरी टांग में गोली लगी। मुझे यक़ीन है कि स्नाइपर आसानी से यह समझ सकता था कि मैं शांतिपूर्ण रूप से एक किनारे खड़ा हुआ हूं।
उन्होंने कहा, इस्राईली स्नाइपर प्रदर्शनकारियों और वहां खड़े फ़िलिस्तीनियों की टांगों को निशाना बना रहे थे, ताकि दोबारा वे चलकर वहां नहीं पहुंच सकें।
जदल्लाह 9 साल की उम्र से सर्फ़िंग कर रहे थे और उनका कहना है कि वह अपने इसी शौक़ के लिए जी रहे थे। msm