अमेरिका यमन में युद्ध क्यों चाह रहा है?
अमेरिकी रक्षामंत्री जनरल जेम्स मैटिस ने भी सांकेतिक रूप से यमन युद्ध के बंद करने के आह्वान के साथ कहा है कि आगामी 30 दिनों के भीतर यमन में शांति स्थापित करने के लिए यमनी नेताओं के मध्य वार्ता आरंभ होनी चाहिये।
सऊदी अरब की राजशाही सरकार के विरोधी सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के बाद सऊदी अरब और अमेरिका पर जो दबाव बढ़ गया है उसके बाद अमेरिका के विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ने यमन युद्ध के बंद करने का आह्वान किया है।
माइक पोम्पियो ने कहा है कि सऊदी अरब की अगुवाई में बनने वाले गठबंधन को चाहिये कि वह यमन पर अपने हमलों को बंद करे। साथ ही उन्होंने कहा है कि यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों को भी बंद होना चाहिये। इसी प्रकार अमेरिकी विदेशमंत्री ने वार्ता आरंभ करने की मांग की है।
इसी बीच अमेरिकी रक्षामंत्री जनरल जेम्स मैटिस ने भी सांकेतिक रूप से यमन युद्ध के बंद करने के आह्वान के साथ कहा है कि आगामी 30 दिनों के भीतर यमन में शांति स्थापित करने के लिए यमनी नेताओं के मध्य वार्ता आरंभ होनी चाहिये।
रोचक बात यह है कि अमेरिकी अधिकारी ऐसी स्थिति में यमन में युद्ध के बंद करने और वार्ता आरंभ करने का आह्वान कर रहे हैं जब अमेरिका की हरी झंडी मिलने के बाद ही सऊदी अरब ने यमन के खिलाफ पाश्विक हमला आरंभ किया था और इस हमले में अब तक 14 हज़ार से अधिक यमनी मारे जा चुके हैं।
मारे जाने वालों में ध्यान योग्य संख्या बच्चों और महिलाओं की है। 26 मार्च 2015 से सऊदी अरब ने यमन पर हमला आरंभ कर रखा है इस अवधि में अमेरिका ने सऊदी अरब को अरबों डालर का हथियार और सऊदी अरब को सैन्य प्रशिक्षण देकर भारी मुनाफा कमाया है।
दूसरे शब्दों में निर्धन व इस्लामी देश पर हमला करने और यमनी जनता के नरसंहार में अमेरिका ने सऊदी अरब की सहायता की है।
अमेरिकी सिनेटर बर्नी सेन्डर्ज़ ने इस बारे में कहा है कि अमेरिका अच्छी तरह इस युद्ध में फंस चुका है, सऊदी गठबंधन जिन बमों का प्रयोग करता है उसे हम देते हैं, उन युद्धक विमानों में ईंधन हम भरते हैं जो इन बमों को लोगों पर गिराते हैं और सूचनाएं भी हम उन्हें देते हैं।
अमेरिका की इतनी सहायता के बाद सऊदी अरब की अगुवाई में काम करने वाला गठबंधन अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल रहा है और यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों का साहसिक प्रतिरोध यथावत जारी है।
यमन युद्ध के जारी रहने, यमन की स्थिति के संकट ग्रस्त होने विशेषकर आम नागरिकों और बच्चों के मारे जाने के कारण काफी समय से ट्रंप सरकार पर आम जनमत यहां तक कि कुछ अमेरिकी सिनेटरों का दबाव है कि वह सऊदी अरब को दी जाने वाली सहायता और समर्थन को कम करे और अब सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के बाद यमन युद्ध को बंद करने के लिए ट्रंप सरकार पर दबाव बढ़ गया है।
बहरहाल यमन युद्ध को बंद करने और वार्ता आरंभ करने पर आधारित अमेरिकी अधिकारियों के बयानों को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। MM