ख़ाशुक़जी हत्याकांड का अगला चरण क्या होगा?
अरबी समाचारपत्र रायुल यौम ने अपने संपादकीय में जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या के मामले में ट्रम्प की ओर से सऊदी अरब के समर्थन की ओर संकेत करते हुए इस हत्याकांड के अगले चरण के बारे में पेश किए जाने वाले समीकरणों पर रौशनी डाली है।
रायुल यौम के प्रधान संपादक अब्दुल बारी अतवान ने लिखा है कि अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प से इस देश के संचार माध्यमों और प्रतिनिधि सभा के टकराव के बाद इस बात की भी संभावना है कि ख़ाशुक़जी हत्याकांड का अगला चरण इस हत्याकांड के सऊदी आरोपियों के बजाए ट्रम्प का ही तख़्ता पलट जाए। उन्होंने लिखा है कि तुर्क राष्ट्रपति अर्दोग़ान के सलाहकार यासीन अक्ताई ने बताया है कि ख़ाशुक़जी के हत्यारों ने उनके शरीर के टुकड़े करने के बाद उसे एसिड में डाल दिया और फिर सऊदी कोन्सलेट के गटर में उसे बहा दिया। इस बात की पुष्टि सऊदी कोन्सलेट के गटर के पाइपों से हो गई है। तुर्क अधिकारियों ने इस बात की घोषणा करके शायद ख़ाशुक़जी हत्याकांड में अपना अंतिम तीर चला दिया है।
अतवान ने लिखा है कि तुर्क राष्ट्रपति बार बार कह चुके हैं कि ख़ाशुक़जी की हत्या का आदेश सऊदी अरब के उच्च स्तरीय शासकों द्वारा दिया गया था और साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि यह आदेश सऊदी नरेश मुहम्मद बिन सलमान ने नहीं दिया था। इस प्रकार शक की सूई सीधे सीधे युवराज मुहम्मद बिन सलमान पर जा कर ठहर जाती है जो व्यवहारिक रूप से सऊदी अरब के शासक हैं। इस शक को इस लिए भी बल मिलता है कि ख़ाशुक़जी की हत्या के लिए जो 15 सदस्यीय टीम तुर्की आई थी उसमें अधिकतर लोग बिन सलमान के निकटवर्ती थे।
अब सवाल यह है कि ट्रम्प, जिन्हें अमरीकी गुप्तचर विभाग की प्रमुख जीना हेस्पल के माध्यम से ख़ाशुक़जी हत्याकांड की आॅडियो फ़ाइलें मिल चुकी हैं, क्या नीति अपनाएंगे? ट्रम्प के निकटवर्ती हल्क़े इस प्रकार की अफ़वाहें उड़ा रहे हैं कि अमरीका देशों को नहीं बल्कि लोगों को प्रतिबंधित करता है। इससे स्पष्ट हो जाता है कि अगर अमरीका प्रतिबंध लगाएगा भी तो सऊदी अरब पर नहीं बल्कि ख़ाशुक़जी की हत्या में शामिल टीम पर लगाएगा। यह भी संभव है कि प्रतिबंध सिर्फ़ उन लोगों पर लगाए जाएं जिन्होंने ख़ाशुक़जी की हत्या की थी। मतलब यह है कि ट्रम्प और उनके दामाद जेयर्ड कूश्नर से घनिष्ठ संबंध रखने वाले मुहम्मद बिन सलमान को प्रतिबंधों से कोई नुक़सान नहीं होगा। प्रतिबंध केवल ईरान के लिए हैं।
अब्दुल बारी अतवान आगे लिखते हैं कि यह तो पता नहीं कि ट्रम्प ने कांग्रेस के मध्यावधि चुनावों के परिणाम सामने आने और रिपब्लिकन पार्टी की पराजय के बाद सऊदी अधिकारियों के ख़िलाफ़ किस प्रकार के प्रतिबंध लागू करने के वादे किए हैं लेकिन यह बात स्पष्ट है कि अमरीकी कांग्रेस आधे अधूरे समाधानों को स्वीकृति नहीं देगी। अमरीका के हालिया चुनावों के परिणामों ने ट्रम्प को अमरीका में सबसे बड़े और शायद सबसे सशक्त मोर्चे यानी अमरीकी कांग्रेस और अमरीकी मीडिया के सामने ला खड़ा किया है। यह मोर्चा शायद ख़ाशुक़जी हत्याकांड में लिप्त लोगों का तख़्ता न पलटे लेकिन अगर उसके दृष्टिगत प्रतिबंध नहीं लगाए गए तो वह अमरीकी राष्ट्रपति का तख़्ता ज़रूर पलट देगा।
रायुल यौम के प्रधान संपादक अंत में लिखते हैं कि ये अमरीकी मीडिया और विशेष रूप से वाॅशिंग्टन पोस्ट समाचारपत्र ही था जिसने तत्कालीन राष्ट्रपति रिचर्ड निकसन को उनके राष्ट्रपति काल के दूसरे चरण में वियेतनाम युद्ध समाप्त करने का फ़ैसला करने के कारण सत्ता से वंचित कर दिया था। एेसा नहीं लगता है कि वाॅशिंग्टन पोस्ट, ख़ाशुक़जी की हत्या और उनके शव को एसिड में गलाने का फ़ैसला करने वाले सबसे बड़े सऊदी अधिकारी को इस मामले से बरी करने की कोशिशों की अनदेखी करेगा। अतवान लिखते हैं कि मैं भविष्यवाणी नहीं कर रहा हूं लेकिन ख़ाशुक़जी हत्याकांड में आने वाले अगले परिवर्तन चौंकाने वाले होंगे। (HN)