क्या बिन सलमान की मनोकामना अलहुदैदा में दम तोड़ जाएगी?
पिछले दिनों यमन के पश्चिमोत्तरी शहर में स्थित अलहुदैदा की घटना, एक बार फिर आले सऊदी शासन द्वारा जमाल ख़ाशुक़्जी की हत्या के परिणामों के दृष्टिगत बढ़चढ़कर सामने आ गयी।
बहुत से राजनैतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अलहुदैदा में युद्ध की आग दोबारा भड़काने के पीछे सऊदी अरब और संयुक्त अरब का यह प्रयास है कि मीडिया और जनमत के ध्यान को सऊदी अरब और मुहम्मद बिन सलमान से हटाकर अलहुदैदा पर केन्द्रित कर रखें।
जैसा कि सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने विरोधी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़्जी की हत्या की वजह से पैदा होने वाले राजनैतिक और संचारिक दबाव को कम करने के लिए अलहुदैदा में संकट बढ़ाने केल िए मुहम्मद बिन ज़ाएद के साथ समझौता करने के प्रयास में हैं। इसी षड्यंत्र के अंतर्गत यमन और यमन के बाहर के विभिन्न क्षेत्रों से 35 हज़ार एजन्टों को उस क्षेत्र में भेजना जिनमें से अधिकतर का संबंध दाइश और अलक़ायदा से था और बाद में वह जब ओमालेक़ा ब्रिगेड के अंतर्गत एकत्रित हो गये, इस पर हमले और इस शहर के परिवेष्टन को क़ा करने की योजना का एक भाग थी।
इन लोगों को एक जगह एकत्रित करने और पश्चिम व अमरीका के आधुनिक हथियारों से इन्हें लैस करने के पीछे मुहम्मद बिन सलमान का लक्ष्य, अलहुदैदा पर नियंत्रण के लिए नई झड़पें शुरु करना और एक ज़बरदस्त जीत अपनी छोली में डालना है ताकि इस प्रकार से जमाल ख़ाशुक्जी की हत्या से पैदा होने वाले दबाव को कम करके दुनिया का ध्यान अलहुदैदा की झड़पों की ओर कर दिया जाए। मुहम्मद बिन सलमान के इस षड्यंत्र का एक अन्य लक्ष्य, अपने नाम एक सैन्य सफलता करना है ताकि इस माध्यम से जमाल ख़ाशुक़्जी की हत्या के बारे में उनकी विश्वसनीयता पर जो बट्टा लगा है उसे दोबारा बहाल कर सकें क्योंकि मीडिया ने उनके आते ही उन्हें ऊंचे ऊंचे नाम दिए और सुधारवादी, शांति प्रेमी, नौकरशाही और मध्यमार्गी जैसी उपाधियों से उन्हें नावाज़ा था। मुहम्मद बिन सलमान पश्चिमी मीडिया के ध्यान को अपनी ओर आकर्षित करना चाहते हैं क्योंकि इन्हीं मीडिया चैनलों ने उन्हें पूरी तरह निरस्त्रीकरण कर दिया।
इस समय मीडिया उन्हें नादान तानाशाह का नाम दे रही है बल्कि उनके नाम के साथ आरी भी जुड़ गया है। मीडिया हल्क़ों में मुहम्मद बिन सलमान और आरी का नाम आपस में इतना अधिक मिल गया है कि उन्हें अलग नहीं किया जा सकता।
बिन सलमान ने अलहुदैदा बंदरगाह में आम नागरिकों पर हमले के बारे में अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं की चेतावनियों की अनदेखी करते हुए बहुत ही तेज़ी से एक या दो दिन के भीतर ही इस क्षेत्र का परिवेष्टन कर लिया और शहर पर कई ओर से हमले आरंभ कर दिए किन्तु यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों के प्रतिरोध ने बिन सलमान और बिन ज़ायद के षड्यंत्रों को विफल बना दिया और दस दिनों तक भीषण झड़पों के बावजूद उन्हें कोई सफलता नहीं मिल सकती और सऊदी गठबंन सेना और उसके पिठ्ठुओं को बहुत अधिक जानी व माली नुक़सान सहन करना पड़ा। यमन के वाॅर मीडिया सेन्टर ने यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों की ओर से बिछाई गयी जाल में दसियों सऊदी एजेन्टों के मारे जाने का वीडियो जारी किया। यमनी सेना के प्रवक्ता यहिया सरीअ का कहना है कि अलहुदैदा में भीषण झड़पें हो रही हैं। अलहुदैदा में मौजूद यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के एक नेता मुहम्मद नासिर अलबुख़ैती ने कहा कि गठबंधन सेना चौथी बार अलहुदैदा में पराजित हुई है और उसे कोई सफलता नहीं मिल सकी।
बहरहाल यमन की अलहुदैदा घटना भी मुहम्मद बिन सलमान के सपने को साकार नहीं कर सकी क्योंकि वह चाहते थे कि ख़ाशुक़्जी के भूत से वह अलहुदैदा पर हमले तेज़ करके पीछा छुड़ा लेंगे किन्तु यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों ने एेसा नहीं होने दिया। (AK)