जमाल ख़ाशुक़जी के वाट्सएप के वह 400 मैसेज
सऊदी अरब के वरिष्ठ पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी ने 2 अक्टूबर में हत्या होने से ठीक पहले अपने एक सऊदी साथी को 400 से अधिक व्हॉट्सएप संदेश भेजे थे।
प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक़ वरिष्ठ सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी ने अक्टूबर में हत्या होने से पहले अपने एक निर्वासित सऊदी साथी को 400 से ज़्यादा व्हॉट्सएप संदेश भेजे थे, जिसमें उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को 'क्रूर' व 'पैक-मैन' क़रार दिया था और कहा था कि वह अपने रास्ते में आने वाले सभी लोगों को बर्बाद कर सकता है, यहां तक कि अपने समर्थकों को भी। सीएनएन ने सोमवार को अपनी एक विशेष रिपोर्ट में कहा कि ख़ाशुक़जी ने मोंट्रियाल के कार्यकर्ता उमर अब्दुल अज़ीज़ को व्हॉट्सएप द्वारा संदेश भेजे थे।
अब्दुल अज़ीज़ द्वारा साझा किए गए संदेशों में वॉयस रिकॉर्डिग, तस्वीरें, वीडियो शामिल हैं, साथ ही उन्होंने एक व्यक्ति की पेंट हुई तस्वीर साझा की है, जो क्राउन प्रिंस की क्रूरता भरे रवैये के कारण गंभीर संकट में दिखाई पड़ रहा है। इससे पहले ख़ाशुक़जी ने मई माह में भेजे अपने एक संदेश में कहा था, "जितना अधिक वह चाहते हैं, उतना अधिक लोगों को वह नुक़सान पहुंचाते हैं।" ख़ाशुकजी ने यह संदेश सऊदी कार्यकर्ताओं के एक गुट को गिरफ़्तार किए जाने के बाद किया था। उन्होंने कहा था कि, "मैं आश्चर्यचकित नहीं होऊंगा, अगर इस उत्पड़ीन की आंच उन्हें समर्थन करने वालों तक भी पहुंचती है तो।"
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार अक्टूबर, 2017 और अगस्त 2018 के बीच लगभग रोज़ाना की बातचीत में ख़ाशुकजी और अब्दुल अज़ीज़ ने आले सऊद सरकार द्वारा देश निकाला किए गए सऊदी युवकों को वापस घर लाने के लिए एक इलेक्ट्रॉनिक सेना का गठन करने और सोशल मीडिया पर प्रिंस के प्रचार को धूल में मिलाने की योजना बनाई थी। अब्दुल अज़ीज ने रविवार को सीएनएन के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "जमाल का मानना था कि एमबीएस (सऊदी युवराज) एक मुद्दा है, एक समस्या है और उन्होंने कहा था कि इस बच्चे को रोका जाना चाहिए" लेकिन अगस्त में जब उन्हें पता लगा कि उनकी बातचीत का अंदेशा सऊदी अधिकारियों को लग गया है तो उन्होंने लिखा 'ख़ुदा, हमारी मदद करे'. इसके दो महीने बाद ही उनकी हत्या हो गई। (RZ)