संयुक्त राष्ट्र संघ की नबील रजब की रिहाई पर ताकीद
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संयुक्त राष्ट्र संघ ने बहरैन में मानवाधिकार कार्यकर्ता नबील रजब की रिहाई पर ताकीद की है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan ०५, २०१९ १३:०७ Asia/Kolkata

संयुक्त राष्ट्र संघ ने बहरैन में मानवाधिकार कार्यकर्ता नबील रजब की रिहाई पर ताकीद की है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता फ़रहान हक़ ने बहरैन में नागरिक आज़ादी के उल्लंघन की भर्त्सना करते हुए आले ख़लीफ़ा शासन से इस देश के मानवाधिकार केन्द्र के प्रमुख नबील रजब को जल्द से जल्द रिहा करने की मांग की। यूएन ने नबील रजब की गिरफ़्तारी को ग़ैर क़ानूनी बताते हुए बहरैनी अधिकारियों से इस देश की जनता के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को मान्यता देने की मांग की।

आले ख़लीफ़ा शासन ने इस देश की जनता के मूल राजनैतिक, सामाजिक व नागरिक अधिकारों से वंचित करने में तनिक भी संकोच नहीं दिखाया और इस देश में घुटन का माहौल बना रखा है। ऐसे माहौल में नजीब रजब सहित मानवाधिकार व राजनैतिक कार्यकर्ता आले ख़लीफ़ा शासन की हिंसक कार्यवाही का निशाना बने हुए है। आले ख़लीफ़ा शासन की दिखाटवी अदालत ने नबील रजब को 5 साल क़ैद की सज़ा सुनायी है। बहरैनी सुरक्षा बलों ने नबील रजब को 13 जून 2016 को घर से गिरफ़्तार किया और उस समय से वह जेल में बंद हैं।

बहरैन में आले ख़लीफ़ा शासन के मानवाधिकार व राजनैतिक कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ पुलिसिया व्यवहार के यथावत जारी रहने पर आधारित रिपोर्टें सामने आयी हैं और इस देश में विरोधियों को झूठे बहानों से जेल में डाला जा रहा है।

वैसे आले ख़लीफ़ा शासन और आले सऊद शासन के संबंध में संयुक्त राष्ट्र संघ के विरोधाभासी व्यवहार का भी अरब अधिकारियों को राजनैतिक कार्यकर्ताओं व मीडिया कर्मचारियों के ख़िलाफ़ बड़े दुस्साहस से अपराध करने में रोल रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ एक ओर इन शासनों की आलोचना करता है दो दूसरी ओर सबसे बड़े मानवाधिकार संगठन में उन्हें सदस्यता दिए हुए है। जमाल ख़ाशुक़जी की नृशंस हत्या और नजीब रजब को जेल में क़ैद करना संयुक्त राष्ट्र संघ के विरोधाभासी व्यवहार का नतीजा है।(MAQ/T)