नेतनयाहू के पांचवें मंत्रीमंडल का गठन, क्या होगा प्रभाव?
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इस्राईल में होने वाले संसदीय चुनाव के बाद बिनयामिन नेतनयाहू की लिकूड पार्टी अन्य चरमपंथी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव जीतने में सफल रही जिसके बाद नेतनयाहू मंत्री मंडल के गठन में व्यस्त हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr १९, २०१९ १५:२३ Asia/Kolkata

इस्राईल में होने वाले संसदीय चुनाव के बाद बिनयामिन नेतनयाहू की लिकूड पार्टी अन्य चरमपंथी पार्टियों के साथ मिलकर चुनाव जीतने में सफल रही जिसके बाद नेतनयाहू मंत्री मंडल के गठन में व्यस्त हैं।

नेतनयाहू पिछले एक दशक में लगातार चौथी बार और पिछले 23 साल में पांचवीं बार मंत्रीमंडल का गठन कर रहे हैं। नेतनयाहू दरअस्ल एविग्डर लेबरमैन की यस्राईल बतीनू पार्टी से गठजोड़ करने पर विवश हैं जिसने कुछ महीने पहले नेतनयाहू का साथ छोड़ दिया था  और उन्हें समय से पहले चुनाव कराने पर मजबूर होना पड़ा था। लेबरमैन की पार्टी को 5 सीटें मिली हैं।

लेबरमैन इस शर्त पर पुनः नेतनयाहू के साथ एलायंस कर रहे हैं कि वह ग़ज़्ज़ा पट्टी में हमास की सरकार का अंत कर दें। उन्होंने युद्ध मंत्रालय और गृ  ह मंत्रालय के क़लमदान भी मांगे हैं। दूसरी ओर एक अन्य दक्षिणपंथी पार्टी को  भी 5 सीटें मिली हैं और उसने शिक्षा व न्याय मंत्रालयों की मांग की है। नेतनयाहू यह दोनों मंत्रालय अपनी पार्टी के नेताओं को देना चाहते हैं। नेतनयाहू पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं अतः वह न्याय मंत्रालय अपनी पार्टी के पास रखने पर ज़ोर दे रहे हैं।

नेतनयाहू ख़ुद को मज़बूत ज़ाहिर कर रहे हैं और पांचवीं बार सरकार के गठन को अपनी बड़ी सफलता के रूप में पेश कर रहे हैं लेकिन इस्राईल के भीतर और बाहर बहुत से गलियारों का कहना है कि नेतनयाहू ने अंतर्राष्ट्रीय समझौतों का लगातार उल्लंघन करके चरमपंथी धड़ों का समर्थन तो हासिल कर लिया है लेकिन यह ज़मीनी सच्चाई है कि इस्राईल को गंभीर ख़तरे में डाल दिया है। नेतनयाहू तो यह कहते हैं कि वह मज़बूती के साथ इस्राईल के हितों के लिए लड़ रहे हैं मगर जानकारों का मानना है कि जिन नीतियों और योजनाओं को नेतनयाहू इस्राईल की मज़बूती का माध्यम समझ रह हैं वही इस्राईल के लिए घातक साबित हो रही हैं क्योंकि बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी घोषित करने, गोलान हाइट्स के इलाक़े को इस्राईल का हिस्सा घोषित करने और पश्चिमी तट के इलाक़े को इस्राईल में शामिल करने जैसे मुद्दों पर जहां नेतनयाहू को विश्व स्तर पर विरोध का सामना है वहीं फ़िलिस्तीन में सशस्त्र प्रतिरोध करने वाले संगठनों के इस विचार को बल मिला है कि इस्राईल से निपटने का एक ही रास्ता है कि पूरी ताक़त से प्रतिरोध किया जाए क्योंकि इस्राईल केवल शक्ति की भाषा ही समझता है।