इमारात की बंदरगाह पर जहाज़ों में धमाके, अटकलें तेज़
संयुक्त अरब इमारात की अलफ़ुजैरा बंदरगाह पर जहाज़ों में धमाके हुए जिसके बाद आग लग जाने से कम से कम 7 लोगों की जान चली गई।
इन धमाकों के बारे में कई प्रकार की अटकलें लगाई जा रही हैं। एक विचार यह व्यक्त किया जा रहा है कि यह धमाके संयुक्त अरब इमारात के लिए बहुत बड़ा झटका हैं इसीलिए इस देश के अधिकारियों ने पहले तो धमाकों से संबंधित रिपोर्टों का खंडन किया और कहा कि अलफ़ुजैरा बंदरगाह में किसी प्रकार की कोई दुर्घटना नहीं हुई है लेकिन जब यह ख़बर बड़े पैमाने पर फैल गई तो अबू धाबी के अधिकारी इस घटना की पुष्टि करने पर मजबूर हुए। सऊदी अरब के ऊर्जा मंत्री ख़ालिद फ़ालेह ने भी स्वीकार किया कि इस घटना में सऊदी अरब के भी दो तेल टैंकरों को नुक़सान पहुंचा है।
एक विचार यह व्यक्त किया जा रहा है कि इस घटना ने इमारात की सुरक्षा और रक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर किया है क्योंकि अब तक यह नहीं पता चल सका है कि यह घटना कैसे हुई।
तीसरा विचार यह है कि सऊदी और इमारात के अधिकारी इस घटना के लिए निश्चित रूप से इलाक़े में मौजूद इस्लामी प्रतिरोध मोर्चे को ज़िम्मेदार ठहराने की कोशिश करेंगे और इस घटना का बहाना बनाकर इस मोर्चे को नुक़सान पहुंचान की चेष्टा में लग जाएंगे लेकिन इस प्रकार की घटनाओं के बाद बेबुनियाद आरोप लगाने की कोशिश निंदनीय मानी जाएगी। यह लगता है कि इमारात ने इलाक़े के अनेक देशों में आतंकवाद को बढ़ावा देने की जो नीति अपनाई है अब उसका दुष्परिणाम इमारात के सामने आ रहा है। इस संदर्भ में यमन युद्ध में इमारात की विनाशकारी भूमिका की ओर विशेष रूप से इशारा किया जा सकता है।
चौथा विचार अरब जगत के प्रख्यात लेखक अब्दुल बारी अतवान ने यह व्यक्त किया कि यह घटना संभावित रूप से इलाक़े मे मौजूद आतंकी तत्वों या खुद इस्राईली ख़ुफ़िया एजेंसी मोसाद ने करवाई हो जिसकी कोशिश है कि इलाक़े में सैनिक टकराव शुरू हो जाए। अतवान का कहना है कि शनिवार को अमरीका के जहाज़रानी विभाग ने चेतावनी दी थी कि ईरान अमरीका के व्यापारिक जहाज़ों और तेल टैंकरों को निशाना बना सकता है।
इस्लामी गणतंत्र ईरान ने इस घटना की निंदा की और यह दर्शाया कि उसे क्षेत्र की शांति व सुरक्षा की चिंता है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अब्बास मूसवी ने कहा कि इस घटना से जुड़ी सारी जानकारियां सामने आनी चाहिएं।