जॉन बोल्टन किन लक्ष्यों को साधन के लिए मध्यपूर्व आये हैं?
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन 28 मई मंगलवार को संयुक्त अरब इमारात की राजधानी अबूधाबी पहुंचे।
अबूधाबी पहुंचने के बाद अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने कहा कि क्षेत्र के सुरक्षा मामलों की समीक्षा करने के लिए वह अपने घटकों से भेंटवार्ता करेंगे। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि बुधवार को उन्होंने इमारात में किन अधिकारियों से भेंटवार्ता की।
प्रबल संभावना है कि संयुक्त अरब इमारात में जो भेंटवार्ता होने वाली है उसमें सऊदी अरब, मिस्र और बहरैनी अधिकारी भी उपस्थित होंगे।
यह भेंटवार्ता 30 मई को सऊदी अरब के पवित्र नगर मक्का में होने वाली वार्ता की भूमिका है। मक्का में होने वाली वार्ता में अरब और क्षेत्र के इस्लामी देशों के नेता भाग लेने वाले हैं।
सऊदी अरब के विदेशमंत्रालय ने घोषणा की है कि इस देश के नरेश मलिक सलमान ने अरब देशों और फार्स खाड़ी की सहकारिता परिषद के सदस्य देशों का आह्वान किया है कि वे इस देश के तेल प्रतिष्ठानों के खिलाफ होने वाली कार्यवाहियों और संयुक्त अरब इमारात में फुजैरह घटना की समीक्षा के उद्देश्य से 30 मई को मक्का में होने वाली बैठक में भाग लें।
संयुक्त राष्ट्र संघ में सऊदी अरब के राजदूत अब्दुल्लाह अलमोअल्लमी ने समाचार पत्र इन्डीपेन्डेन्ट से साक्षात्कार में ईरान के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों पर प्रसन्नता जताई और कहा कि मक्का में होने वाली बैठक ईरान से मुकाबले के लिए हो रही है।
ईरान के संबंध में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के शत्रुतापूर्ण रवइये के दृष्टिगत अभी से यह कहा जा सकता है कि वह फुजैरह घटना में ईरान के हाथ होने का निराधार आरोप लगायेंगे।
इसी प्रकार वह ईरान पर आरोप मढ़ेंगे कि वह क्षेत्र के उनके घटक देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है और ईरान से मुकाबले के लिए वह एक संयुक्त मोर्चा बनाने की बात करेंगे।
अमेरिकी रक्षामंत्रालय पेंटागॉन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पिछले शुक्रवार को कहा था कि अमेरिका फुजैरह बंदरगाह पर तेल टैंकर पर और इराक में राकेट हमले के लिए ईरान और उसके समर्थक गुटों को ज़िम्मेदार समझता है जबकि ईरान ने इन हमलों में अपनी हर प्रकार की भूमिका से इंकार किया है।
बहरहाल अमेरिका अरब देशों को हमेशा यह समझाने का प्रयास करता है कि उनकी सुरक्षा को गम्भीर खतरा है और वह अपनी सुरक्षा को सुनिश्चित बनाने के लिए उससे आधुनिकतम हथियार खरीदें जबकि वास्तविकता यह है कि ईरान से किसी भी देश की सुरक्षा को कोई ख़तरा नहीं है और उसका मानना है कि क्षेत्रीय देशों की सहकारिता और सामूहिक प्रयास से सुरक्षा को निश्चित बनाया जा सकता है। MM