यमन के भगोड़े राष्ट्रपति के भागने का सिलसिला जारी
यमन के अपदस्थ, भगोड़े राष्ट्रपति मंसूर हादी के भागने का सिलसिला जारी है और अब वह सऊदी अरब से भागकर अमेरिका में शरण लेने पहुंच गए है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक़, सऊदी अरब ने यमन के जिस अपदस्थ राष्ट्रपति को फिर से सत्ता में पहुंचाने का बहाना बनाकर यमन पर हमले आरंभ किए थे, उसके लिए अब सऊदी अरब में ही रहना मुश्किल हो गया है। यमनी सूत्रों की ख़बर के अनुसार, यमन के भगोड़े राष्ट्रपति मंसूर हादी ने सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ को एक पत्र लिखकर पिछले पांच वर्षों के दौरान उनकी और उनकी भगोड़ी सरकार के अधिकारियों की मेज़बानी करने पर धन्यवाद किया है। समाचारों में आया है कि यमन के अपदस्थ राष्ट्रपति मंसूर हादी अपनी बिमारी का बहाना बनाकर सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ छोड़कर अमेरिका के ओहियो राज्य भाग खड़े हुए हैं।
अरब-अमेरिकी वेबसाइट ने लिखा है कि, मंसूर हादी ने यमन के लिए सऊदी राजदूत मोहम्मद साईद जाबिर के ज़रिए जो पत्र सऊदी नरेश को लिखा है उसमें उन्होंने जहां अपने सऊदी अरब छोड़कर जाने की बात लिखी है वहीं यह भी लिखा है कि उनका स्वास्थ्य अब ठीक नहीं है इसलिए वह राजनीतिक और सरकारी गतिविधियों को अंजाम नहीं दे सकते हैं। दूसरी ओर अमेरिका के ओहियो राज्य के विभिन्न सूत्रों का कहना है कि यमन के भगोड़े राष्ट्रपति अपने परिवार और कुछ अन्य लोगों के साथ वहां पहुंच चुके हैं।
इस बीच यमन के अपदस्थ व भगोड़े राष्ट्रपति के दर-दर भटकने को लेकर टीकाकारों का कहना है कि वह सऊदी अरब से स्वयं नहीं गए हैं बल्कि उन्हें वहां से भगाया गया है। टीकाकारों के मुताबिक़, अब आले सऊद सरकार को मंसूर हादी की कोई ज़रूरत नहीं रह गई है। मंसूर हादी के नाम पर यमन युद्ध आरंभ करने वाली सऊदी सरकार की पोल भी खुल चुकी है कि यमन में राजनीतिक संकट का बहाना बनाकर जो इस ग़रीब देश पर पाश्विक हमले जारी हैं उसके पीछे की कुछ और ही कहानी है। यमन युद्ध से जहां क्षेत्र में लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है और स्वयं सऊदी अरब को आर्थिक नुक़सान पहुंच रहा है वहीं अमेरिका, इस्राईल और कुछ यूरोपीय देश इस युद्ध से बहुत ही ज़्यादा ख़ुश हैं क्योंकि इस युद्ध के ज़रिए ही वे सऊदी गठबंधन को अरबों डॉलर के हथियार बेच रहे हैं। (RZ)