ईरान से फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के बढ़ते सहयोग से ज़ायोनियों में आतंक
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इस्लामी गणतंत्र ईरान से हमास और जेहादे इस्लामी जैसे फ़िलिस्तीनी गुटों के बढ़ते सहयोग से ज़ायोनी शासन के सैन्य विशेषज्ञों की नींद उड़ी हुई है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul २७, २०१९ १२:४६ Asia/Kolkata
  • ईरान से फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के बढ़ते सहयोग से ज़ायोनियों में आतंक

इस्लामी गणतंत्र ईरान से हमास और जेहादे इस्लामी जैसे फ़िलिस्तीनी गुटों के बढ़ते सहयोग से ज़ायोनी शासन के सैन्य विशेषज्ञों की नींद उड़ी हुई है।

अरबी समाचारपत्र रायुल यौम ने अपने एक लेख में लिखा है कि आजकल जिस विषय ने इस्राईल के सैन्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा रखी है वह ईरान के साथ फ़िलिस्तीनी संगठनों का बढ़ता सहयोग और इस सहयोग के नतीजे में ग़ज़्ज़ा में प्रतिरोधकर्ता गुटों को मिलने वाली अत्यंत विकसित सैन्य टैकनाॅलोजी है। इस्राईल के मशहूर सैन्य टीकाकार नीर डेफ़ोरी ने, जो इस्राईल की सैन्य संस्थाओं से निकट संबंध के लिए ख्याति रखते हैं, इन संस्थाओं के समक्ष मौजूद एक डरावने सपने की सूचना दी है। उनका कहना है कि इस्राईल की सैन्य संस्थाओं को अत्यंत अहम सूचनाएं मिली हैं जिनसे पता चलता है कि एक ही समय में दक्षिणी लेबनान और ग़ज़्ज़ा पट्टी में इस्राईल और प्रतिरोधकर्ता गुटों के बीच टकराव की संभावना पाई जाती है। यह ऐसी बात है जो इससे पहले के किसी भी युद्ध में नहीं देखी गई थी।

 

पत्र ने लिखा है कि ज़ायोनी सैन्य संस्थओं को जो दूसरी अहम बात पता चली है वह यह है कि ईरान ने हिज़्बुल्लाह और हमास को अत्यंत विकसित हथियार और मीज़ाइल दिए हैं जिनमें फ़ातेह-110 मीज़ाइल शामिल है जो 250 से 300 किलो मीटर की दूरी से फ़ायर किए जाने पर निशाने को बड़े सटीक ढंग से भेद सकता है। इसी तरह एंटी टैंक और कंधे पर रख कर फ़ायर किए जाने वाले मीज़ाइल भी इन संगठनों को दिए गए हैं जो अपाचे हेलीकाॅप्टर और ड्रोन विमानों को मार गिराने की क्षमता रखते हैं। हमास संगठन के राजनैतिक कार्यालय के उप प्रमुख सालेह आरूरी ने पिछले सप्ताह तेहरान की यात्रा करके इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई से मुलाक़ात की थी। उन्होंने इस मुलाक़ात को ऐतिहासिक बताया है और कहा है कि ईरानियों और फ़िलिस्तीनियों के रणनैतिक संबंध बड़े गहरे हैं।

 

रायुल यौम ने लिखा है कि शायद ईरान अपने दुश्मनों और क्षेत्र में अमरीका के हितों के लिए ख़तरनाक हो लेकिन एक बड़ा ख़तरा जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती, हिज़्बुल्लाह, अंसारुल्लाह, हमास, जेहादे इस्लामी और हश्दुश्शाबी जैसे ईरान के घटक गुटों की व्यापक सैन्य क्षमता है। इस्राईल के सैन्य कमांडर इस बात को अच्छी तरह समझते हैं और इसी वजह से वे उत्तरी व दक्षिणी इस्राईल में युद्ध शुरू करने से बच रहे हैं क्योंकि वे जानते हैं कि एक ही क्षण में कई अप्रत्याशित घटनाएं हो सकती हैं। शायद यही वजह है कि ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री बेनयामिन नेतनयाहू ग़ज़्ज़ा पट्टी में युद्ध शुरू होने के दो ही दिन बाद तेज़ी से मिस्र पहुंच गए और उन्होंने युद्ध विराम के लिए क़ाहेरा को दौड़ा दिया। नेतनयाहू अप्रत्याशित घटनाओं से डरते हैं और यह बात उनकी बातों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। (HN)