जर्मनी सऊदी अरब को हथियार न बेचेः ग्रीनपीस संगठन की मांग
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अंतर्राष्ट्रीय संगठन ग्रीनपीस ने जर्मन सरकार से सऊदी अरब को हथियार बेचने पर लगी रोक की मुद्दत बढ़ाने की मांग की है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep १०, २०१९ ०७:२४ Asia/Kolkata
  • 1 सितंबर 2019 को यमन के ज़मार ज़िले में सऊदी अरब के हवाम हमले में तबाह घर (एएफ़पी के सौजन्य से)
    1 सितंबर 2019 को यमन के ज़मार ज़िले में सऊदी अरब के हवाम हमले में तबाह घर (एएफ़पी के सौजन्य से)

अंतर्राष्ट्रीय संगठन ग्रीनपीस ने जर्मन सरकार से सऊदी अरब को हथियार बेचने पर लगी रोक की मुद्दत बढ़ाने की मांग की है।

सोमवार को ग्रीनपीस संगठन ने जर्मन सरकार से मांग की कि वह सऊदी अरब को हथियार के निर्यात पर लगी रोक की मुद्दत को बढ़ाए।

बर्लिन से अनातोली न्यूज़ के अनुसार, ग्रीनपीस के कार्यकर्ताओं ने 10 हज़ार दस्तख़त वाला एक निवेदन जर्मनी के आर्थिक व ऊर्जा मामलों के मंत्रालय को पेश करते हुए, सऊदी अरब को हथियारों के निर्यात पर लगी रोक की मुद्दत बढ़ाने की मांग की। यह मुद्दत सितंबर के अंत में ख़त्म हो रही है।

इस संगठन ने कहा है कि यमन जंग में रियाज़ के विनाशकारी रोल के मद्देनज़र, जर्मन सरकार को चाहिए कि सऊदी अरब को हथियारों के निर्यात पर लगी रोक की मुद्दत बढ़ाए।

पिछले साल जर्मनी की अंगेला मर्केल सरकार ने यमन जंग में सऊदी अरब के रोल के मद्देनज़र, इस देश को हथियार बेचने के संबंध में पाबंदी लगायी थी।

बर्लिन ने, सऊदी अरब के आलोचक पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की तुर्की के इस्तांबोल शहर में सऊदी वाणिज्य दूतावास में हत्या के बाद, सऊदी अरब को हथियारों का निर्यात कुछ समय के लिए रोक दिया था। जर्मनी अमरीका, ब्रिटेन और फ़्रांस के साथ मिलकर यमन के ख़िलाफ़ सऊदी गठबंधन को हथियारों की आपूर्ति कर रहा है।

अंतर्राष्ट्रीय संगठन और मानवाधिकार संगठन अब तक जर्मनी, ब्रिटेन, अमरीका और फ़्रांस सहित अतिक्रमकणारी सऊदी गठबंधन का समर्थन करने वाले देशों से, सऊदी अरब और यूएई को हथियार का निर्यात रोकने की बारंबार मांग कर चुके हैं।

सऊदी गठबंधन पश्चिमी हथियारों से यमन की पीड़ित जनता का जनसंहार करता है।

सऊदी अरब ने यूएई सहित अपने घटकों के साथ यमन पर मार्च 2015 में हमला शुरु किया। इन हमलों में अब तक 85 हज़ार बच्चों सहित 1 लाख से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं। ज़्यादातर बच्चे सऊदी गठबंधन द्वारा थोपीय गयी जंग की वजह से उत्पन्न भुखमरी और सूखे के नतीजे में मौत की नींद सो गए।(MAQ/N)