इराक़ में प्रदर्शन कहीं कोई षडयंत्र तो नहीं?
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इराक़ में पिछले कुछ दिनों के दौरान प्रदर्शन हुए हैं। इन विरोध प्रदर्शनों का कारण बेरोज़गारी, सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार तथा सार्वजनिक सेवा की अनुचित स्थिति बताया जा रहा है। इन प्रदर्शनों में कई लोग हताहत और घायल हुए हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct ०४, २०१९ १२:०४ Asia/Kolkata
  • इराक़ में प्रदर्शन कहीं कोई षडयंत्र तो नहीं?

इराक़ में पिछले कुछ दिनों के दौरान प्रदर्शन हुए हैं। इन विरोध प्रदर्शनों का कारण बेरोज़गारी, सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार तथा सार्वजनिक सेवा की अनुचित स्थिति बताया जा रहा है। इन प्रदर्शनों में कई लोग हताहत और घायल हुए हैं।

जानकारों का कहना है कि इस बात के बहुत से साक्ष्य पाए जाते हैं कि इराक़ के हालिया विरोध प्रदर्शन, एक सुनियोजित षडयंत्र दिखाई दे रहा है।  इस बारे में कुछ ऐसी बाते हैं जिनसे विरोध प्रदर्शनों के षडयंत्र होने की प्रबल संभावना पाई जाती है।  उदाहरण स्वरूप इराक़ के हालिया विरोध प्रदर्शन के बारे में सोशल मीडिया पर जो तस्वीरें दिखाई जा रही हैं उनमें से कुछ वास्तविकता से परे हैं।  कुछ चित्रों में प्रदर्शनकारियों को ऐसे प्लेकार्ड लिए हुए दिखाया जा रहा है जो शिया मरजइयत के विरुद्ध हैं।  इसी के साथ सरकार गिराने के बारे में भी नारे सुनाई दे रहे हैं।  यह सब ऐसी स्थिति में है कि जब इराक़ी जनता के बीच वरिष्ठ धर्मगुरूओं के प्रति विशेष आदर पाया जाता है।  यही कारण है कि सन 2014 में आयतुल्लाह सीस्तानी के फ़त्वे का इराक़ियों ने समर्थन करते हुए दाइश के विरुद्ध संघर्ष के लिए स्वयंसेवी संगठन "हश्दुश्शाबी" का गठन किया था।  दूसरी बात यह है कि इराक़ की सरकार वहां की जतना के हाथों चुनी गई है उसे बाहर से थोपा नहीं गया है।  इन बातों के अतिरिक्त एक अन्य विशेष बात यह है कि इराक़ के हालिया प्रदर्शन, अरबई रैली के आरंभ होने के साथ ही शुरू हुए हैं।  ऐसा लगता है कि प्रदर्शनों के माध्यम से अरबई रैली को टारगेट किया गया है।  इसका एक उद्देश्य यह लगता है कि इस राष्ट्रव्यापी रैली को रोका जाए या फिर इसको सीमित कर दिया जाए।  इन विरोध प्रदर्शनों के माध्यम से विदेश से आने वालो विशेषकर ईरानियं को अरबईन रैली में भाग लेने से रोकना है।

इराक़ के एक राजनैतिक दल के महासचिव क़ैस अलख़ज़अली कहते हैं कि इराक़ के भीतर कुछ राजनैतिक दल सरकार की विदेश नीति से राज़ी नहीं हैं इसलिए वे इसका विरोध कर रहे हैं।  इन दलों की इच्छा है कि सरकार उनके हिसाब से निर्णय ले न कि राष्ट्रीय हितों को सामने रखकर।  इराक़ की सरकार यमन के विरुद्ध सऊदी अरब के युद्ध में सऊदी गठबंधन की विरोधी है और वह कुछ अरब देशों द्वारा अवैध ज़ायोनी शासन के साथ संबन्ध सामान्य करने की प्रक्रिया का भी विरोध करती है।

एक अन्य बिंदु यह भी है कि इराक़ के वर्तमान विरोध प्रदर्शनों का समर्थन बासी तत्व खुलकर कर रहे हैं।  इन विरोध प्रदर्शनों के आरंभ होते ही इराक़ के पूर्व तानाशाह सद्दाम की बेटी रग़द सद्दाम ने ट्वीट करते हुए इन प्रदर्शनों का समर्थन किया और कहा कि हम तुम्हारे साथ हैं।  टीकाकारों का कहना है कि इराक़ की वर्तमान आर्थिक समस्याओं या आर्थिक भ्रष्टाचार को अनदेखा नहीं किया जा सकता किंतु पश्चिमी और अरब जगत के संचार माध्यमों द्वारा इन विरोध प्रदर्शनों का कवरेज इस सुनियोजित ढंग से किया जा रहा है जिसके कारण  इराक़ियों को बहुत ज़्यादा होशियार रहने की आवश्यकता है।