सऊदी अरब यमन पर हमला क्यों नहीं रोक रहा है?
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यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रवक्ता व वरिष्ठ वार्ताकार मोहम्मद अब्दुस सलाम ने शनिवार को तेहरान के दौरे पर थे, ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ से मुलाक़ात की
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct २७, २०१९ १३:२६ Asia/Kolkata
  • सऊदी अरब यमन पर हमला क्यों नहीं रोक रहा है?

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रवक्ता व वरिष्ठ वार्ताकार मोहम्मद अब्दुस सलाम ने शनिवार को तेहरान के दौरे पर थे, ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ से मुलाक़ात की

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रवक्ता व वरिष्ठ वार्ताकार मोहम्मद अब्दुस सलाम ने जो एक शिष्टमंडल के साथ शनिवार को तेहरान के दौरे पर थे, ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ से मुलाक़ात की और यमनी जनता को इस्लामी गणतंत्र ईरान की ओर से मानवीय मदद व राजनैतिक समर्थन की सराहना की। शनिवार को हुयी इस मुलाक़ात में मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने यमन पर थोपी गयी जंग और इस देश की लगभग पिछले 5 साल से जारी नाकाबंदी की वजह से पैदा हुये कठिन हालात पर खेद जताया और यमन में जनसंहार रुकने और इस देश की नाकाबंदी ख़त्म होने की मांग की।

यमन में जंग के जारी रहने से महिलाओं और बच्चों का जनसंहार हो रहा है और इस देश की अर्थव्यवस्था विनाश की ओर बढ़ रही है। यमन जंग की वजह से दसियों लाख लोग बेघर हुए हैं। प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक़, यमन पर थोपी गयी जंग की वजह से 16000 से ज़्यादा शहीद हुए और दसियों हज़ार घायल हुए।

ऐसा लगता है कि सऊदी अरब यह सोच रहा है कि जंग के ज़रिए अपना लक्ष्य हासिल कर लेगा और इसी भ्रम में वह यमन में शांति क़ायम करने से संबंधित प्रस्तावों का सार्थक जवाब नहीं दे रहा है, हालांकि सऊदी अरब के लिए यमनी राष्ट्र पर जंग थोपकर अपना लक्ष्य हासिल करना बहुत मुश्किल है।

रियाज़ यमन विवाद के अंत के लिए राजनैतिक हल और बातचीत की बात तो करता है लेकिन व्यवहारिक रूप से उसकी कथनी और करनी में विरोधाभास पाया जाता है। रियाज़ यमन पर हमले जारी रखे हुए है और हमले रुकने से संबंधित हर सुझाव का विरोध कर यह दर्शाना चाहता है कि उसकी स्थिति बेहतर है। हालांकि वास्तविकता पर आधारित समीक्षा से पता चलता है कि सऊदी अरब के हमलों पर यमनी सेना और स्वयंसेवी बल अंसारुल्लाह के जवाबी हमले के मुक़ाबले में न सिर्फ़ यह कि रियाज़ बहुत की कमज़ोर है बल्कि उसकी आक्रमक नीति अब निष्प्रभावी साबित हो रही है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान शुरु से यमन में जंग की समाप्ति, संघर्ष विराम और शांति क़ायम होने की मांग करता आ रहा है। इस संबंध में तेहरान ने यमनियों के बीच आपस में व्यापक बातचीत शुरु होने और विदेशी हमले रुकने पर आधारित योजना पेश की। तेहरान का मानना है कि इस योजना पर जितनी देर में अमल होगा उतना ज़्यादा जानी और माली नुक़सान होगा।

जैसा कि हाल में तेहरान का दौरा करने वाले पाकिस्तानी प्रधान मंत्री इमरान ख़ान ने जब इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई से मुलाक़ात की तो उन्होंने यमन जंग रुकने के बारे में ईरान की ओर से पेश किए गए 4 सूत्रीय सुझाव का उल्लेख किया और कहा कि इस जंग के रुकने का क्षेत्र पर सकारात्मक असर पड़ेगा।

विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने यमन के लिए मानवीय सहायता भेजने में ईरान की तत्परता का एलान किया और यमन संकट का राजनैतिक मार्ग से हल होने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ईरान यमन में संघर्ष विराम क़ायम होने और यमनी पक्षों के बीच आपस में बातचीत का समर्थन करता है। (MAQ/T)