इस्राईल पर अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में मामला दर्ज, एक क़ानूनी क़दम
इस्राईल के खिलाफ जांच आरंभ करने के आईसीसी के फैसले का फिलिस्तीनियों ने भरपूर स्वागत किया है किंतु तेलअबीव ने इस फैसले का विरोध किया है।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय की वकील ने पिछले शुक्रवार को कहा था कि आईसीसी फिलिस्तीन के पश्चिमी तट, गज़्ज़ा पट्टी और बैतुल मुक़द्दस में इस्राईल के अपराधों के बारे में जांच आरंभ करने वाली है। इस घोषणा के बाद फिलिस्तीन और इस्राईल की ओर से अलग अलग प्रतिक्रियाएं प्रकट की गयीं। फिलिस्तीनियों का कहना है कि यह फैसला वास्तव में न्याय की जीत है । इसी लिए उन्होंने इस फैसले का स्वागत किया है। साइब उरैक़ात ने कहा कि " फाते बेनसुवा " का यह फैसला यह संदेश लिये है कि न्याय स्थापना संभव है। दूसरी ओर अमरीका और ज़ायोनी शासन ने इसे न्याय पर धब्बा बताते हुए दावा किया है कि यह फैसला गैर कानूनी है। नेतेन्याहू ने कहा है कि यह दिन सच्चाई और न्याय के लिए एक काला दिन है और यह फैसला गलत है। इस्राईल के एटार्नी जनरल ने तो यह तक कह दिया है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायालय इस मामले में दखल देने की योग्य ही नहीं है। आईसीसी का यह फैसला इस अदालत के पंद्रहवें अनुच्छेद के अनुसार पूरी तरह से कानूनी है क्योंकि उसमें इस अदालत के वकील को यह अधिकार दिया गया है। वैसे भी अगर किसी भी क्षेत्र में मानवाधिकारों का उल्लंघन होता है तो आईसीसी को उस बारे में जांच का अधिकार है। इस न्यायालय के घोषणापत्र के अनुसार नरसंहार, यातना, लोगों के शरीर को नुक़सान पहुंचाना , बंदियों को कानूनी प्रक्रिया से वंचित रखना, गैर कानूनी तौर पर उन्हें बंदी बनाए रखना, आवासीय क्षेत्रों पर हमला और बमबारी और लोगों को भूखा रखना आदि युद्ध अपराध हैं और इन सब मामलों में आईसीसी हस्तक्षेप कर सकता है।
इस्राईल यह सब कुछ करता है और इससे भी भयानक अपराध सीना ठोंक कर करता है क्योंकि उसे अमरीका का आशीर्वाद प्राप्त है। गज़्जा की जनता के बारे में उसने एक साथ यह सारे अपराध किये हैं। बरसों से पंद्रह लाख लोगों की एेसी घेराबंदी कर रखी है जिसकी मिसाल इतिहास में नहीं मिलती इस लिए सन 2015 में फिलिस्तीनियों की मांग पर आज आईसीसी ने जो फैसला किया है वह पूरी तरह से कानूनी है। (MM)