अमेरिका ने फ़िलिस्तीनियों को चेतावनी दी
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फ़िलिस्तीनी प्रशासन के प्रमुख ने भी सेन्चुरी डील को स्वीकार करने से इंकार कर दिया
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Jan ३१, २०२० ११:१५ Asia/Kolkata
  • अमेरिका ने फ़िलिस्तीनियों को चेतावनी दी

फ़िलिस्तीनी प्रशासन के प्रमुख ने भी सेन्चुरी डील को स्वीकार करने से इंकार कर दिया

अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार ने इस देश की "डील आफ सेन्चुरी" का फ़िलिस्तीनियों द्वारा विरोध किये जाने की प्रतिक्रिया में कहा है कि फिलिस्तीनियों को इस डील को स्वीकार कर लेना चाहिये। अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार और दामाद जेर्ड कुश्नर ने गुरूवार को एक साक्षात्कार में कहा कि "डील आफ सेन्चुरी" फ़िलिस्तीनियों के लिए अंतिम अवसर है।

उन्होंने वर्तमान फिलिस्तीनी नेतृत्व को न मानने की ओर सांकेतिक धमकी देते हुए कहा कि अगर फ़िलिस्तीन का वर्तमान नेतृत्व इस योजना के प्रति सहमति जताने का साहस नहीं रखता है तो शायद फिलिस्तीनियों का भावी नेतृत्व इसके प्रति सहमति जतायेगा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 28 जनवरी को सेन्चुरी डील का अनावरण किया था। इस अमेरिकी- इस्राईली डील के अनुसार क़ुद्स को जायोनी शासन को दिया जायेगा, जो कई लाख फिलिस्तीनी जो दूसरे देशों में शरणार्थी का जीवन बिता रहे हैं उन्हें अपनी मातृभूमि में वापसी का अधिकार नहीं होगा और फिलिस्तीनी केवल ग़ज़्ज़ा पट्टी और जार्डन नदी के पश्चिमी किनारे के बाक़ी बचे भाग के ही मालिक होंगे।

बहुत से देशों और फिलिस्तीन के समस्त गुटों ने इस योजना का विरोध किया है। फ़िलिस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास ने ट्रंप के आह्वान को रद्द कर दिया और कहा है कि वह कभी भी ऐसी कोई योजना स्वीकार नहीं करेंगे जिससे एक स्वतंत्र देश के गठन पर आधारित फिलिस्तीनी जनता की मांग पूरी न हो।

साथ ही उन्होंने कुद्स को फिलिस्तीन के स्वतंत्र देश की राजधानी बनाये जाने पर बल दिया।

जानकार हल्कों का मानना है कि फिलिस्तीन- इस्राईल विवाद के मध्य अमेरिका ने कभी भी निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाई है और वह सदैव जायोनी शासन की अतिग्रहणकारी सरकार का समर्थक व पक्षधर रहा है। यही नहीं उसने मध्यस्थ का चोला पहन कर जायोनी शासन की मांगों को व्यवहारिक बनाने का प्रयास किया है।

इसी प्रकार जानकार हल्कों का मानना है कि जब ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों की अनदेखी करते हुए क़ुद्स को इस्राईल की राजधानी के रूप में मान्यता दी और अपने दूतावास को तेलअवीव से हटाकर कुद्स स्थांतरित कर दिया और कहा कि फिलिस्तीन की अतिग्रहित भूमियों में जायोनी कालोनियों का निर्माण ग़ैर कानूनी नहीं है तभी अमेरिका की मध्यस्थता का असली मुखौटा सामने आ गया था और जब तक इस्राईल को अमेरिका सहित कुछ देशों का आशीर्वाद प्राप्त रहेगा तब तक इस बात की कामना नहीं करना चाहिये कि फिलिस्तीनियों को न्याय और उनका अधिकार मिलेगा। MM