इदलिब में हार ... फिर भी अर्दोग़ान को जीत का भ्रम!
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तुर्की की सेना सीरिया के इदलिब प्रांत में निरंतर हार रही है और उसके सैनिक मारे जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद इस देश के राष्ट्रपति का दावा है कि तुर्क सेना ने इदलिब के हालात को तुर्की के पक्ष में मोड़ दिया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb २८, २०२० १३:३३ Asia/Kolkata
  • इदलिब में हार ... फिर भी अर्दोग़ान को जीत का भ्रम!

तुर्की की सेना सीरिया के इदलिब प्रांत में निरंतर हार रही है और उसके सैनिक मारे जा रहे हैं लेकिन इसके बावजूद इस देश के राष्ट्रपति का दावा है कि तुर्क सेना ने इदलिब के हालात को तुर्की के पक्ष में मोड़ दिया है।

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोग़ान ने न्याय व विकास पार्टी की राजनैतिक अकादमी के उद्घाटन समारोह में दावा किया कि तुर्की की सेना ने इदलिब के हालात को अपने पक्ष में कर लिया है। उनके इस दावे से कुछ ही घंटे पहले इसी पार्टी के प्रवक्ता ने कहा था कि तुर्की, सीरियाई सरकार को इस बात की इजाज़त नहीं देगी कि वह उन क्षेत्रों को अपने नियंत्रण में रखे जिन पर उसने क़ब्ज़ा कर लिया है। उन्होंने इसी के साथ कहा था कि तुर्क सेना ने सीरियाई सेना को इदलिब के कुछ क्षेत्रों से पीछे हटने के लिए जो मोहलत दी गई है उसके समाप्त होते ही, वह अपनी कार्यवाही शुरू कर देगी।

 

इदलिब की ज़मीनी स्थिति के बारे में तुर्की के इन दोनों अधिकारियों के बयान एक दूसरे से बहुत मेल नहीं खाते। इदलिब में इन दिनों सीरियाई सेना बड़ी तेज़ी से प्रगति पर है और उसने गुरुवार को एक बड़ी कार्यवाही करके इदलिब के अनेक अहम क्षेत्रों को आतंकियों से मुक्त करा लिया। इस आधार पर कहा जा सकता है कि तुर्की के इन दोनों अधिकारियों के बयान, केवल प्रोपेगंडे के लिए हैं और उनका लक्ष्य, तुर्की की निरंतर पराजयों पर पर्दा डालने के अलावा कुछ नहीं है, विशेष कर इस लिए भी कि सीरिया ने घोषणा कर दी है कि वह तुर्की के नियंत्रण में जा चुके अपने सभी क्षेत्रों की आज़ादी तक अपनी सैन्य कार्यवाही जारी रखेगा।

 

तुर्की के दावों और सीरियाई सेना की ज़मीनी प्रगति के साथ ही रूस के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की है कि वह इदलिब में स्थिति बिगड़ने के लिए तुर्की को ज़िम्मेदार मानता है। माॅस्को ने कहा है कि सीरिया में स्थिति जटिल होने की एक अहम वजह, रूस और तुर्की के बीच होने वाले समझौते का पालन न किया जाना है और इसका अर्थ यह है कि इदलिब में तुर्की की उपस्थिति का रूस की नज़र में कोई क़ानूनी औचित्य नहीं है इस लिए स्वाभाविक है कि रूस, आगामी दिनों में सीरियाई सेना के प्रति अपना समर्थन बढ़ा देगा और तुर्क सेना और आतंकियों के क़ब्ज़े से और अधिक गांवों व काॅलोनियों को रिहाई मिलेगी।

 

सीरियाई के हालात पर नज़र रखने वाले टीकाकारों को विश्वास है कि तुर्की को जिस तरह से इदलिब में पराजय हो रही है और उसके सैनिक मारे जा रहे हैं उनके मद्देनज़र अगली वार्ता में उसकी पोज़ीशन कमज़ोर होगी। इस बात को रूस के राष्ट्रपति के सलाहकार दिमित्री पेसकोफ़ के उस नकारात्मक जवाब से भी समझा जा सकता है जो उन्होंने इस सवाल के जवाब में दिया कि क्या रूसी राष्ट्रपति पुतीन पांच मार्च को इस्तंबोल के दौरे पर जाएंगे? उनका स्पष्ट रूप से कहना था कि पुतीन पांच मार्च को तुर्की का दौरा नहीं करेंगे, उस दिन उनका, दूसरा कार्यक्रम है। तुर्की के राष्ट्रपति ने कहा था कि वे पांच मार्च को इदलिब की स्थिति पर चर्चा के लिए इस्तंबोल में पुतीन से मिलेंगे। इस प्रकार इदलिब के हालात तुर्की की मर्ज़ी के ख़िलाफ़ जा रहे हैं और अब सवाल यह है कि अगर हालात इसी तरह आगे बढ़ते रहे तो फिर क्या हमें कुछ अनेपक्षित घटनाओं का इंतेज़ार करना चाहिए? शायद कुछ ही दिन में इस सवाल का जवाब मिल जाए। (HN)