कैसा होगा बिना तेल का सऊदी अरब?
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तेल के दाम जब 20 डॉलर से भी नीचे गिरे तो सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को यह ख़याल ज़रूर आया होगा कि तेल के बग़ैर सऊदी अरब की दुनिया कैसी होगी। दुनिया को जब तेल की आवश्यकता नहीं होगी, सिर्फ़ यह ख़याल ही सऊदी युवराज के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसकाने के लिए काफ़ी है, जो तख़्त पर बैठने की कुछ ज़्यादा ही जल्दबाज़ी में हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr २६, २०२० १५:०८ Asia/Kolkata
  • कैसा होगा बिना तेल का सऊदी अरब?

तेल के दाम जब 20 डॉलर से भी नीचे गिरे तो सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को यह ख़याल ज़रूर आया होगा कि तेल के बग़ैर सऊदी अरब की दुनिया कैसी होगी। दुनिया को जब तेल की आवश्यकता नहीं होगी, सिर्फ़ यह ख़याल ही सऊदी युवराज के पैरों के नीचे से ज़मीन खिसकाने के लिए काफ़ी है, जो तख़्त पर बैठने की कुछ ज़्यादा ही जल्दबाज़ी में हैं।

2015 में जब उनके पिता किंग सलमान ने गद्दी संभाली थी तो सऊदी अरब के पास 732 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था। पिछले साल दिसम्बर तक 233 अरब डॉलर की कमी के साथ तेल से माला-माल इस देश के पास कुल विदेशी मुद्रा भंडार 499 अरब डॉलर बचा था।

सऊदी अरब की जीडीपी प्रति व्यक्ति में भी गिरावट आई है। विश्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक़, 2012 में यह 25,243 से 2018 में गिकर 23,338 रह गई थी। घोंसले में बचे हुए अंडे तेज़ी से कम हो रहे हैं। आईएमएफ़ का अनुमान है कि इस साल शुद्ध घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 19 प्रतिशत तो अगले साल 27 प्रतिशत हो जाएगा। कोरोना वायरस और तेल संकट के कारण 2022 में यह 50 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।

यमन युद्ध, सीरिया, इराक़ और लेबनान में हस्तक्षेप, अमरीका और यूरोपीय देशों से बड़े पैमाने पर हथियारों की ख़रीद, भविष्य के शहर Neom के निर्माण जैसी अंधाधुंध और घमंडी परियोजनाएं, पेंटिंग्स, महल, व्यवसायियों और राजकुमारों की धरपकड़ और अब कोरोना सऊदी राजशाही के जहाज़ को डुबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

0.3 फ़ीसद के विकास के साथ कोरोना वायरस महामारी के पहले से ही सऊदी अर्थव्यवस्था संकट में थी। कोरोना वायरस के कारण, लॉडाउन और उमराह व हज के रद्द होने से रियाज़ को अरबों डॉलर की चपत लगी है।

ख़राब निवेश भी सऊदी अरब की अर्थव्यस्था के नष्ट होने का एक कारण है। निवेश के मामले में बिग ब्रदर सउदी अरब फ़ार्स खाड़ी के अन्य छोटे अरब पड़ोसी देशों से कहीं पीछे है।

पब्लिक इनवेस्टमेंट फ़ंड (PIF) ने निवेश के मामले में सऊदी अरब को यूएई, कुवैत और क़तर के बाद की श्रेणी में रखा है। संयुक्त अरब इमारात 1.213 ट्रिलियन डॉलर के साथ पहले स्थान, 522 अरब डॉलर के साथ कुवैत दूसरे और 328 अरब डॉलर के साथ क़तर तीसरे स्थान पर है, जबकि 320 अरब डॉलर के साथ सऊदी अरब का स्थान 11वां है।

कोरोना वायरस महामारी के दौरान सऊदी अरब अपनी अर्थव्यस्था को सहारा देने के लिए केवल 1 प्रतिशत ख़र्च कर रहा है, तो वहीं क़तर 5.5 प्रतिशत, बहरैन 3.9 प्रतिशत और यूएई 1.8 प्रतिशत ख़र्च कर रहे हैं।

सऊदी किंग ने विशेष आदेश जारी करके कोरोना वायरस लॉकडाउन के दौरान कर्मचारियों को केवल 60 प्रतिशत वेतन के भुगतान का एलान किया है।

इन परिस्थितियों के मद्देनज़र कहा जा सकता है कि निकट भविष्य में सऊदी अरब पर क़र्ज़ा बढ़ता जाएगा और यह देश दुनिया के अमीर तरीन देशों की सूचि से बाहर निकल जाएगा।

सऊदी अरब की चका चौंद ख़त्म हो जाएगी, देश में अफ़रा-तफ़री और अराजकता का माहौल होगा और तेल से पहले वाला समय वापस लौट आएगा। msm