क्या इराक़ में दाइश की फिर वापसी हो रही है?
इराक़ में हालिया दिनों आतंकी संगठन दाइश ने कुछ हमले किए और आने वाले दिनों में आशंका है कि आतंकियों की ओर से और भी कार्यवाहियां होंगी तो सवाल यह है कि क्या दाइश की वापसी हो रही है?
शनिवार की सुबह इराक़ी स्वयंसेवी फ़ोर्स हश्दुश्शअबी पर सामर्रा के इलाक़े में दाइशी आतंकियों का हमला हुआ। यह हमला नाकाम रहा। सलाहुद्दीन प्रांत में इसके अलावा भी कई जगहों पर दाइश ने हमले की कोशिश की मगर इराक़ी फ़ोर्सेज़ ने आप्रेशन करके कई आतंकियों को ढेर कर दिया। इस आप्रेशन में इराक़ी स्वयंसेवी फ़ोर्स के 13 जवान शहीद और 20 घायल हो गए।
यह दिसम्बर 2017 में दाइश की पराजय की घोषणा के बाद इस आतंकी संगठन की ओर से इराक़ में सबसे बड़ा हमला था।
हालिया दिनों में करकूक, दियाली और सलाहुद्दीन में दाइश के हमले हुए हैं। इससे लगता है कि दाइश ने उत्तरी इराक़ में व्यापक रूप से हमलों की तैयारियां की हैं। ज़ीक़ार और आमेरली में भी आतंकियों ने हमले किए हैं।
इराक़ में इस समय राजनैतिक संकट है। प्रधानमंत्री आदिल अब्दुल महदी त्यागपत्र दे चुके हैं और कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में काम कर रहे हैं जबकि नए मनोनीत प्रधानमंत्री मुसतफ़ा अलक़ाज़ेमी अभी अपनी सरकार का गठन नहीं पाए हैं। इसका मतलब यह है कि यह समय एसा है कि कोई बड़ी योजना बनाना और उस पर अमल कर पाना कठिन है। यह स्थिति इराक़ में पिछले पांच महीने से है।
इराक़ के सामने गंभीर आर्थिक परिस्थितियां भी हैं। इससे पहले इराक़ सरकार आतंकवाद से संघर्ष में अपनी पूरी ताक़त इस्तेमाल कर रही थी मगर तेल की क़ीमतों में होने वाली भारी गिरावट ने इराक़ सरकार की आर्थिक क्षमताओं को बुरी तरह प्रभावित किया है। कोरोना से लड़ाई भी इराक़ी सरकार के लिए बहुत ख़र्चीली योजना साबित हुई है। इन हालात ने आम जनता में भी असंतोष पैदा कर दिया है जिसका नतीजा प्रदर्शनों की शक्ल में दिखाई दे रहा है।
इराक़ में स्वयंसेवी फ़ोर्स हश्दुश्शअबी ने दाइश की कमर तोड़ने में बुनियादी भूमिका निभाई मगर हालिया महीनों में यह देखने में आया कि इराक़ के ही कुछ राजनैतिक दलों ने हश्दुश्शअबी के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी और उसे हाशिए पर डालने की कोशिश की। इन सारे हालात का फ़ायदा आतंकियों को मिला है।
दाइश की गतिविधियां तेज़ होने के पीछे क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय ताक़तों का भी हाथ है। इराक़ की सरकार ने इस देश से अमरीकी सैनिकों के बाहर निकलने पर ज़ोर दिया और यह तय पाया कि जून महीने से अमरीकी सैनिकों के इराक़ से निष्कासन पर वार्ता होगी। अमरीकी हरगिज़ नहीं चाहते कि वह इराक़ से वापस जाएं और इराक़ उन्हें सहन करने के लिए तैयार नहीं है। इन हालात में दाइश के हमले शुरू होने का सीधा मतलब है कि अमरीका को इराक़ में अपने सैनिक बाक़ी रखने का बहाना दिया जा रहा है और अमरीका ख़ुद इसका इंतेज़ाम कर रहा है।
तो इन हालात में सरकार की ज़िम्मेदारियां बढ़ गई हैं और मुसतफ़ा अलक़ाज़ेमी के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।