यमन में सऊदी-इमाराती गठजोड़ के पीछे का राज़ क्या है?
यमन के दक्षिणी प्रांतों में झड़पों और परिवर्तनों का क्रम निरंतर बढ़ता जा रहा है। जैसे ही किसी इलाक़े में तनाव व सशस्त्र टकराव कम होता है, वैसे ही दूसरे क्षेत्र में बढ़ जाता है जिससे ऐसा लगता है कि यह सब पूर्व निर्धारित है और अंत में इसके चलते सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात और उनके समर्थित लोगों के नियंत्रण वाले सभी इलाक़ों में हालत बिगड़ जाएगी।
दक्षिणी यमन में झड़पों का दायरा बढ़ाने की कोशिश का हर दिन कोई न कोई नया पहलू सामने आ रहा है। इसके माध्यम से ऐसे लक्ष्य हासिल करने की कोशिश की जा रही है जो किसी से छिपे हुए नहीं हैं। इनमें से एक लक्ष्य सुरक्षा की स्थिति को बिगाड़ना है जिससे अन्य लक्ष्यों की पूर्ति का मार्ग समतल होगा। दूसरी ओर जो परिवर्तन हो रहे हैं उनकी गति बहुत तेज़ है। उदाहरण स्वरूप अबयन प्रांत संयुक्त अरब इमारात के समर्थन वाली अंतरिम परिषद के सशस्त्र लोगों और सऊदी अरब समर्थित मंसूर हादी की त्यागपत्र दे चुकी सरकार के लोगों के बीच टकराव के नए केंद्र में बदल चुका है।
ऐसा लगता है कि अबयन के मोर्चे पर जारी लड़ाई, निर्णायक है और अगर इस प्रांत पर मंसूर हादी के बलों का क़ब्ज़ा हो गया तो इसका अर्थ यह होगा कि वे अदन के क़रीब पहुंच जाएंगे। इसी तरह इमारात के समर्थन वाली अंतरिम परिषद का विचार है कि अगर उसने अबयन पर क़ब्ज़ा कर लिया तो अदन में उसकी स्थिति अधिक मज़बूत हो जाएगी। यही वजह है कि यमन के दक्षिणी प्रांतों में स्वाधीन सरकार के गठन की घोषणा के कुछ ही दिन के अंदर इस परिषद के फैलाव की संभावना है। अलबत्ता जो बात स्पष्ट है वह यह है कि स्थानीय गुट, उन क्षेत्रीय शक्तियों के आदेशों का पालन कर रहे हैं जो उनका समर्थन करती हैं चाहे वह सऊदी अरब हो या संयुक्त अरब इमारात हो लेकिन इस समय यह आंतरिक व स्थानीय गुट ही हैं जो व्यवहारिक रूप से लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं।
इस बात के अनेक चिन्ह मौजूद हैं कि यमन के विभिन्न गुटों का समर्थन करने वाले विदेशी पक्षों की इच्छा ही, दक्षिणी यमन में जारी सशस्त्र झड़पों में निर्णायक है। मिसाल के तौर पर सऊदी समर्थित और यमन की अपदस्थ सरकार के अधीन काम करने वाले बल किसी दिन दक्षिणी यमन से निकल जाते हैं और इन क्षेत्रों को अंतरिम परिषद के बलों के हवाले कर देते हैं लेकिन अगले ही दिन वे दक्षिणी यमन के कई शहरों पर हमला करने का फ़ैसला कर लेते हैं ताकि उन्हें अंतरिम परिषद के बलों के नियंत्रण से छुड़ा लें जबकि उनकी जीत की संभावना भी कम ही होती है। दक्षिणी यमन के क्षेत्रों में झड़पों में वृद्धि, भौगोलिक दृष्टि से इस बात की सूचक है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब इमारात के समर्थन वाले बलों के बीच झड़पों में वृद्धि हो गई है और नए नए गठबंधन बनने लगे हैं, उदाहरण स्वरूप इमारात समर्थित अंतरिम परिषद के समर्थन में तारिक अफ़्फ़ाश के हालिया बयान की तरफ़ इशारा किया जा सकता है जिसमें उन्होंने अबयन से लेकर अलमोहरा तक सऊदी अरब के समर्थन वाली अपदस्थ सरकार के ख़िलाफ़ एलाने जंग किया है।
इस बात की अनदेखी करते हुए कि रियाज़ व अबू धाबी एक दूसरे को दक्षिणी यमन में स्थिति बिगड़ने के लिए दोषी ठहरा रहे हैं, वर्तमान समय में ये झड़पें और सैन्य टकराव, सऊदी अरब व संयुक्त अरब इमारात के गठजोड़ की अमानवीय प्रवृत्ति को स्पष्ट करता है जिसके चलते यमन के दक्षिणी प्रांतों में मानवीय स्थिति बहुत अधिक चिंताजनक हो गई है। (HN)