यमन की नाकाबंदी का ख़मियाज़ा सऊदी अरब को भुगतना पड़ेगा
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यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रवक्ता ने कहा कि सऊदी अरब इस कोशिश में है कि सैनिक टकराव से जो हासिल नहीं कर पाया उसे यमन की आर्थिक नाकाबंदी करके हासिल करे लेकिन इस कोशिश में सऊदी अरब ख़ुद को भारी नुक़सान पहुंचाने जा रहा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May १९, २०२० ०३:५८ Asia/Kolkata
  • यमन की नाकाबंदी का ख़मियाज़ा सऊदी अरब को भुगतना पड़ेगा

यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रवक्ता ने कहा कि सऊदी अरब इस कोशिश में है कि सैनिक टकराव से जो हासिल नहीं कर पाया उसे यमन की आर्थिक नाकाबंदी करके हासिल करे लेकिन इस कोशिश में सऊदी अरब ख़ुद को भारी नुक़सान पहुंचाने जा रहा है।

मुहम्मद अब्दुस्सलाह ने कहा कि सऊदी अरब इस समय यमन की मुसलमान जनता को भुखमरी के संकट की ओर ढकेल देना चाहता है। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब की फ़ोर्सेज़ यमन आने वाले पानी के जहाज़ों का रास्ता रोक रही हैं ताकि जनता को बुनियादी ज़रूरत की चीज़ें न मिल सकें।

अंसारुल्लाह आंदोलन के प्रवक्ता ने कहा कि सऊदी अरब की यह कोशिशें हरगिज़ कामयाब नहीं होंगी और उसे अपने किए पर पछताना पड़ेगा।

सऊदी अरब ने मार्च 2015 में यमन के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू कर दिया था। उसकी कोशिश थी कि यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन और यमनी सेना को पूरी तरह ख़त्म करके यमन में अपनी मर्ज़ी की सरकार का गठन करे लेकिन यह योजना नाकाम रही। यमन की सेना और स्वयंसेवी बलों ने अंसारुल्लाह आंदोलन के नेतृत्व में सऊदी अरब के हमलों का सामना किया साथ ही जवाबी हमले करके सऊदी अरब को भारी नुक़सान पहुंचाया।

इस समय सऊदी अरब ने एकपक्षीय रूप से संघर्ष विराम की घोषणा कर रखी है लेकिन वह यमन की नाकाबंदी जारी रखे हुए है।