इराक़ में हिज़्बुल्लाह के सदस्यों की गिरफ़्तारी का मतलब
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इराक़ में हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड के सदस्यों की गिरफ़्तारी और रिहाई, इस देश से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालने के मामले से जुड़ी हुई है और इसमें इराक़ी सरकार पर अमरीका का दबाव काफ़ी प्रभावी है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun २७, २०२० ०६:५० Asia/Kolkata
  • इराक़ में हिज़्बुल्लाह के सदस्यों की गिरफ़्तारी का मतलब

इराक़ में हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड के सदस्यों की गिरफ़्तारी और रिहाई, इस देश से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालने के मामले से जुड़ी हुई है और इसमें इराक़ी सरकार पर अमरीका का दबाव काफ़ी प्रभावी है।

गुरुवार की रात इराक़ में हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड के कई सदस्यों को गिरफ़्तार कर लिया गया जिस पर वाॅशिंग्टन निरंतर इराक़ में अपने सैनिकों और कूटनयिकों पर होने वाले मीज़ाइल हमलों में लिप्त होने का आरोप लगाता है। बताया गया है कि इराक़ की आतंकवाद निरोधक इकाई ने इन लोगों को गिरफ़्तार किया है।हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड इराक़ में, आतंकी गुट दाइश के ख़िलाफ़ संघर्ष में सबसे प्रभावी गुटों में से एक रही है। फ़्रान्स प्रेस ने शुक्रवार को बताया कि इराक़ की हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड के सदस्यों को अमरीकी हितों पर मार्टर गोले फ़ायर करने के कारण गिरफ़्तार किया गया है। इस रिपोर्ट के अनुसार पिछले आठ महीनों से इराक़ में अमरीकी हितों के ख़िलाफ़ इस तरह के हमले रुके नहीं हैं और यह पहली बार है कि जब इराक़ में ईरान समर्थित किसी गुट के सदस्यों को गिरफ़्तार किया गया है।

 

अमरीका के आतंकी हमले में आईआरजीसी के कमांडर जनरल क़ासिम सुलैमानी और इराक़ स्वयं सेवी बल के कमांडर जनरल अबू महदी अलमुहंदिस की शहादत के बाद इराक़ से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालने की मांग ज़ोर पकड़ गई और इसी के साथ इस देश में अमरीकी सैन्य अड्डों पर हमले भी तेज़ हो गए। यहां यह बात भी उल्लेखनीय है कि हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड ने अब तक इन हमलों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है और सिर्फ़ अमरीकी व अंग्रेज़ सैनिकों पर मार्टर हमलों का स्वागत किया है। उसका कहना है कि ब्रिटेन व अमरीका के सैनिक, इराक़ में अवैध रूप से मौजूद हैं और इस देश पर क़ब्ज़ा करने की कोशिश में हैं।

 

जनरल सुलैमानी और जनरल अबू मुहंदिस की शहादत के बाद इराक़ में मौजूद अमरीकी सैनिकों से कहा गया कि वे तुरंत इस देश से बाहर निकल जाएं। इराक़ी संसद इस संबंध में सर्वसम्मति से एक बिल भी पारित कर चुकी है। अलबत्ता इराक़ी सरकार अब तक इस बिल को व्यवहारिक नहीं बना सकी है। अक्तूबर सन 2019 से लेकर अब तक इराक़ में अमरीकी सैनिकों या कूटनयिकों पर कम से कम 33 बार हमले हो चुके हैं जिनमें से छः हमले तो सिर्फ़ पिछले दो हफ़्तों में हुए हैं। इन बातों के मद्देनज़र इराक़ में हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड के सदस्यों की गिरफ़्तारी और रिहाई को इस देश से अमरीकी सैनिकों के निष्कासन के विषय पर खींच-तान समझा जा सकता है और इस संबंध में इराक़ की नई सरकार पर अमरीका का दबाव का भी अवश्य ही कुछ न कुछ असर है। अलबत्ता यह दबाव, प्रभावी नहीं होगा क्योंकि हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड, स्वयं सेवी बल का हिस्सा है जो अब इराक़ के सुरक्षा बल में शामिल हो चुका है।

 

स्वयं सेवी बल, जिसने दाइश से संघर्ष में बुनियादी किरदार अदा किया था, दसियों हज़ार बलों के साथ और इराक़ी संसद में दूसरे सबसे बड़े धड़े के रूप में, इस देश का ऐसा संगठन है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती। स्वयं सेवी बल ने कहा है कि इन मीज़ाइल हमलों में उसका कोई हाथ नहीं है। कुछ टीकाकारों का कहना है कि इराक़ की हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड, ईरान की आईआरजीसी और लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के बाद संख्या व ट्रेनिंग की दृष्टि से तीसरा सबसे बड़ा प्रतिरोधक बल है। शायद यही वजह है कि हिज़्बुल्लाह ब्रिगेड के सदस्यों को गिरफ़्तारी के तुरंत बाद रिहा कर दिया गया। (HN)

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