मस्जिदुल अक़्सा फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की रेड लाइन हैः हमास
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इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास के प्रवक्ता ने कहा है कि बैतुल मुक़द्दस और मस्जिदुल अक़्सा प्रतिरोध आंदोलनों और फ़लिस्तीनी राष्ट्र की रेड लाइन है। उन्होंने कहा कि इनका समर्थन करना नैतिकता और धार्मिक आधार पर इस्लामी जगत का कर्तव्य बनता है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul १८, २०२० ०६:५५ Asia/Kolkata
  • मस्जिदुल अक़्सा फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की रेड लाइन हैः हमास

इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास के प्रवक्ता ने कहा है कि बैतुल मुक़द्दस और मस्जिदुल अक़्सा प्रतिरोध आंदोलनों और फ़लिस्तीनी राष्ट्र की रेड लाइन है। उन्होंने कहा कि इनका समर्थन करना नैतिकता और धार्मिक आधार पर इस्लामी जगत का कर्तव्य बनता है।

अल-आलम टीवी की रिपोर्ट के मुताबिक़, इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास के प्रवक्ता फ़ूज़ी बरहूम ने ज़ायोनी शासन द्वारा जुमे की नमाज़ के लिए मस्जिदुल अक़्सा के बाबुर्रहमा द्वार को बंद किए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बैतुल मुक़द्दस सदैव के लिए फ़िलिस्तीनी राष्ट्र की राजधानी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इस्राईल चाहे जितनी भी कोशिश कर लें उनकी षड्यंत्रकारी योजना सेंचुरी डील किसी भी क़ीमत पर लागू नहीं हो पाएगी। इस बीच इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास के एक वरिष्ठ सदस्य ख़ज़र हबीब ने भी कहा है कि फ़िलिस्तीनी राष्ट्र कभी भी बैतुल मुक़द्दस को अपने क़ब्ज़े में लेने के ज़ायोनी शासन के ख़्वाब को पूरा नहीं होने देगा।

उल्लेखनीय है कि बाबुर्रहमा द्वारा मस्जिदुल अक़्सा का पूर्व में स्थित है। इस्राईल ने बलपूर्वक इसके प्रवेश द्वार का बंद कर रखा था जिसे बैतुल मुक़द्दस के वक़्फ़ बोर्ड फ़रवरी 2019 में 10 वर्षों के संघर्ष के बाद खुलवाने में सफल हो गया था। इसके दोबारा खुलने के बाद से ज़ायोनी शासन के आतंकी सैनिक लगातार नमाज़ियों पर हमले करते रहते हैं और उनके प्रवेश को रोकने की आए दिन कोशिश करते रहते हैं। इस बीच अब तक दर्जनों नमाज़ियों को इस्राईली सैनिकों द्वारा गिरफ़्तार भी किया जा चुका है। (RZ)

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