अलकाज़ेमी की अमरीका यात्रा, लक्ष्य, आशाएं व आशंकाएं
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इराक़ के प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अलकाज़ेमी अपने कई मंत्रियों के साथ दो दिवसीय यात्रा पर वाॅशिंग्टन पहुंचे हैं और गुरुवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प से मुलाक़ात करने वाले हैं।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug २०, २०२० १०:५४ Asia/Kolkata
  • अलकाज़ेमी की अमरीका यात्रा, लक्ष्य, आशाएं व आशंकाएं

इराक़ के प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अलकाज़ेमी अपने कई मंत्रियों के साथ दो दिवसीय यात्रा पर वाॅशिंग्टन पहुंचे हैं और गुरुवार को अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प से मुलाक़ात करने वाले हैं।

अलकाज़ेमी की अमरीका यात्रा पर जो सबसे अहम सवाल सामने आ रहा है वह यह है कि इस यात्रा के वास्तविक लक्ष्य क्या हैं? अपनी इस यात्रा में वे ट्रम्प समेत अहम अमरीकी अधिकारियों से द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय समस्याओं के बारे में बात करेंगे। द्विपक्षीय संबंधों में सबसे मुख्य समस्या, इराक़ में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति है। इराक़ी संसद ने 5 जनवरी 2020 को अपने देश से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालने के विधेयक को मंज़ूरी दी थी। इराक़ की जनता ने भी 24 जनवरी को लाखों की संख्या में सड़कों पर निकल कर अपने देश से अमरीकी सैनिकों को निकाल बाहर करने की मांग की थी। अलबत्ता अमरीकी सरकार प्रतिबंध लगाने और आर्थिक समस्याएं बढ़ाने की धमकी दे कर अपने सैनिकों को इराक़ में बाक़ी रखने की सिर तोड़ कोशिश कर रही है।

 

जून में अमरीका व इराक़ के बीच अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति के बारे में पहले चरण की वार्ता हो चुकी है जिसका कोई ख़ास नतीजा नहीं निकला था। अब इराक़ी प्रधानमंत्री की वाॅशिंग्टन यात्रा में इराक़ व अमरीका के बीच वार्ता का मुख्य मुद्दा एक बार फिर इराक़ से अमरीकी सैनिकों का निष्कासन है। इस बीच इराक़ की संसद में कई अहम धड़ों ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि अगर प्रधानमंत्री ने इराक़ में अमरीकी सैनिकों को बाक़ी रखने की बात मान ली, तो संसद उन्हें उनके पद से हटा देगी।

 

द्विपक्षीय संबंधों के क्षेत्र में अमरीका व इराक़ के बीच एक अन्य अहम विषय इराक़ की आर्थिक समस्याओं का है। इराक़ को अनेक आर्थिक समस्याओं का सामना है। आदिल अब्दुल महदी के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के ख़िलाफ़ जो प्रदर्शन शुरू हुए थे उनकी मूल वजह भी आर्थिक स्थिति पर आपत्ति थी। मुस्तफ़ा अलकाज़ेमी को चिंता है कि कहीं एक बार फिर देश की बुरी आर्थिक स्थिति के ख़िलाफ़ प्रदर्शन न शुरू हो जाएं जैसा कि इससे पहले भी उनकी सरकार के ख़िलाफ़ कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं। इराक़ के प्रधानमंत्री डोनल्ड ट्रम्प समेत अमरीकी अधिकारियों से मुलाक़ात में अपने देश की आर्थिक समस्याओं को कम करने क लिए अमरीका की ओर से मदद की मांग कर सकते हैं।

 

सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी ट्रम्प और अलकाज़ेमी के बीच वार्ता के अहम मुद्दों में शामिल होंगी। इराक़ में अमरीका के दूतावास व सैन्य अड्डों पर पर हो रहे निरंतर हमलों के दृष्टिगत एक तरफ़ वाॅशिंग्टन अलकाज़ेमी से मांग कर रहा है कि वे इराक़ में प्रतिरोधकर्ता गुटों की गतिविधियों पर अंकुश लगाएं और दूसरी तरफ़ इराक़ी प्रधानमंत्री अच्छी तरह जानते हैं कि प्रतिरोधकर्ता गुटों से किसी भी तरह का टकराव उनकी सरकार को भी ख़तरे में डाल देगा और साथ ही 2021 के समय पूर्व संसदीय चुनाव में उनकी स्थिति को भी कमज़ोर कर देगा। इस लिए लगता है कि इस मुद्दे पर भी दोनों पक्ष किसी संयुक्त बिंदु तक नहीं पहुंच सकेंगे और इस संबंध में वार्ता का कोई परिणाम नहीं निकलेगा।

 

कुछ अहम क्षेत्रीय समस्याएं भी हैं जो अमरीका के राष्ट्रपति और इराक़ के प्रधानमंत्री के बीच वार्ता के अहम मुद्दों में शामिल होंगी। इनमें से एक तेहरान से बग़दाद के रिश्ते हैं। अमरीकी सरकार, जिसे इस्लामी गणतंत्र ईरान के ख़िलाफ़ अधिकतम दबाव की अपनी नीतियों में बुरी तरह से विफलता का मुंह देखना पड़ा है, अब इराक़ की सरकार पर दबाव डाल रही है कि वह तेहरान के साथ अपने संबंध कम करे। इराक़ी प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अलकाज़ेमी का अमरीका का दौरा, इस देश में राष्ट्रपति चुनाव से कुछ पहले हुआ है। हालांकि ट्रम्प, इराक़ को ईरान से दूर करके अलकाज़ेमी की इस यात्रा को अपने चुनाव प्रचार में भुनाने का इरादा रखते हैं लेकिन इस बात की प्रबल आशा है कि इराक़ी प्रधानमंत्री ईरान से संबंध कम करने के बारे में अमरीका से कोई वादा नहीं करेंगे।

 

इराक़ की सबसे अधिक सीमाएं ईरान से मिलती हैं और आर्थिक दृष्टि से भी उसे ईरान से संबंध मज़बूत बनाने की ज़रूरत है क्योंकि बिजली और बुनियादी ज़रूरत की अन्य वस्तुएं ईरान ही उसे उपलब्ध करा रहा है। इस बात पर अलकाज़ेमी ने पिछले महीने अपने तेहरान के दौरे में भी बल दिया था। क़तर से प्रकाशित होने वाले समाचारपत्र अलअरबी अलजदीद ने अपने एक लेख में बताया है कि अलकाज़ेमी ने अमरीकियों से स्पष्ट रूप से कह दिया है कि कुछ मामलों में फ़ैसले अंतरिम सरकार नहीं कर सकती बल्कि इसके लिए स्थायी सरकार के गठन की ज़रूरत है और तेहरान से बग़दाद के संबंधों का मामला भी उन्हीं में से एक है। (HN)