जिसको इज़्ज़त रास न आई...
क्षेत्र में प्रतिरोधकर्ता गुटों के दमन के लिए संयुक्त अरब इमारात द्वारा इस्राईल से हाथ मिलाने के बाद, वास्तव में इस बात की आवश्यकता ही नहीं थी कि संयुक्त अरब इमारात के उप विदेशमंत्री उमर ग़ुब्बाश का बयान सुना जाए।
सारे सबूतों से पता चलता है कि यूएई, इस्राईल से संबंधों को सामान्य बनाकर बहुत अधिक आर्थिक लाभ या सुरक्षा समर्थन हासिल करने के प्रयास में नहीं है क्योंकि यह देश ख़ुद भी तेल की दौलत से मालामाल है और अमरीकी आशिर्वाद उसे हासिल था।
अबूधाबी के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन ज़ाएद और उनके मंत्री अनवर क़रक़ाश ने आरंभ में अनेक बयान देकर यह दिखाने की कोशिश की कि यह समझौता, फ़िलिस्तीनियों के हित में है ताकि बिनयामीन नेतनयाहू वेस्ट बैंक के विलय की योजना से पीछे हट जाएं।
इन लोगों ने यह भी दिखाने की कोशिश की कि यह समझौता अमरीका से एफ़-35 युद्धक विमान हासिल करने के लिए किया गया। संयुक्त अरब इमारात के अधिकारियों ने यह दिखाने की कोशिश की कि यह समझौता चिकित्सा, अर्थव्यवस्थ, पर्यटन और सांस्कृतिक क्षेत्र में संबंधों को सामान्य करने के लिए ही हुई है किन्तु इस्राईली अधिकारियों ने खुलकर यूएई की इस मांग का विरोध किया और इस्राईल के इस विरोध से संयुक्त अरब इमारात के अधिकारियों की अपमानजनक औचित्य धरा का धरा रह गया जिसके बाद उन्होंने शर्मनाक समझौते का मुख्य लक्ष्य बयान ही कर दिया।
ऐसा महसूस हो रहा है कि वाशिंग्टन में इमारात के राजदूत सहित संयुक्त अरब इमारात के कुछ अधिकारी और उसके बाद उप विदेशमंत्री उमर ग़ुब्बाश, इस शर्मनाक वादी से निकलने के लिए हाथ पैर मार रहे हैं।
फ़ाक्स न्यूज़ ने ग़ुब्बाश के हवाले से रिपोर्ट दी है कि क्षेत्र में ईरान से तनाव बढ़ने की वजह से इससे भी बढ़कर सुरक्षा समझौता होगा, हमने इस्राईल से सुलह करने का फ़ैसला कर लिया है औरर कूटनयिक संबंध स्थापित करें और इसका यह अर्थ है कि इस काम से हम ज़्यादा से ज़्यादा लाभ उठाएं लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि संयुक्त अरब इमारात ने फ़िलिस्तीन के मुद्दे को छोड़ दिया है।
अभी हाल ही में इस्राईल की कुख्यात ख़ुफ़िया एजेन्सी मोसाद के प्रमुख ने संयुक्त अरब इमारात का आधारिक दौरा भी किया था। सारे साक्ष्य इस बात की तरफ़ इशारा कर रहे हैं कि संयुक्त अरब इमारात चाहे या अनचाहे में इस्राईल की जाल में फंस चुका है और इसी बेइज़्ज़ती से निकलने के लिए वह इधर उधर हाथ पैर मार रहा है, इस तरह की बेइज़्ज़ती से गले लगाने से पहले उसे मिस्र और जार्डन से कम से कम पूछ तो लेना चाहिए। (AK)
ताज़ातरीन ख़बरों, समीक्षाओं और आर्टिकल्ज़ के लिए हमारा फ़ेसबुक पेज लाइक कीजिए!
हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए