यमन जंग के बेहद निर्णायक चरण की उलटी गिनती शुरू!
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यमन के सामरिक सूत्र ख़बर दे रह हैं कि यमनी फ़ोर्सेज़ मारिब प्रांत में जंग के बेहद निर्णयक चरण के लिए तैयार हो चुकी हैं। इस मोर्चे पर अंसारुल्लाह आंदोलन का पलड़ा भारी है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug २७, २०२० १४:३७ Asia/Kolkata
  • यमन जंग के बेहद निर्णायक चरण की उलटी गिनती शुरू!

यमन के सामरिक सूत्र ख़बर दे रह हैं कि यमनी फ़ोर्सेज़ मारिब प्रांत में जंग के बेहद निर्णयक चरण के लिए तैयार हो चुकी हैं। इस मोर्चे पर अंसारुल्लाह आंदोलन का पलड़ा भारी है।

लेबनान के अलअख़बार नामक समाचार पत्र ने अपनी विस्तृत  रिपोर्ट में बताया है कि यमन के मारिब प्रांत के दक्षिणी पश्चिमी भाग में सऊदी अरब और इमारात के गठजोड़ का सबसे महत्वपूर्ण मोर्चा ध्वस्त हो चुका है। यह घटना यमन युद्ध में एतिहासिक बदलाव की शुरुआत साबित होगी। यह एसा विषय है कि सऊदी अरब और इमारात के लिए डरावना सपना बन गया है।

इस समय मारिब में सऊदी अरब और इमारात के गठजोड़ से जुड़ी फ़ोर्सेज़ के बीच मतभेद बहुत गहरा हो गया है और इन फ़ोर्सेज़ का कहना है कि उत्तरी इलाक़ों में सऊदी अरब और इमारात का गठबंधन कुछ नहीं कर पाया बल्कि अंसारुल्लाह के सामने नाकाम हो गया तो मारिब प्रांत में भी अंजाम इससे भिन्न नहीं होगा।

 

बैज़ा प्रांत में यमन की सेना और अंसारुल्लाह ने बहुत बड़े इलाक़े पर क़ब्ज़ा कर लिया और वहां से दाइशी आतंकियों को मार भगाया इस घटना से सऊदी अरब और इमारात के रणनीतिकारों के फ़ैसलों पर बहुत गहरा असर पड़ा है। उनको पता है कि अलबैज़ा प्रांत के बाद मारिब में यमनी सेना और स्वयंसेवी बल तेज़ी से आगे बढ़ सकते हैं। अलक़ायदा और दाइश में आपसी मतभेद थे  लेकिन फिर भी यह दोनों आतंकी संगठन इमारात और सऊदी अरब के हितों की रक्षा में एक दूसरे से सहयोग कर रहे थे। दोनों आतंकी संगठनों की स्थिति कमज़ोर हो जाने के बाद मारिब प्रांत का दक्षिण पश्चिमी भाग अब सऊदी गठबंधन के हाथ से निकलता हुआ महसूस हो रहा है। सऊदी अरब द्वारा समर्थित फ़ोर्सेज़ मारिब प्रांत में अपने मोर्चों से पीछे हटने लगी हैं।

मारिब एक बड़ा प्रांत है जिसकी लंबी सीमा सऊदी अरब से लगती है इसलिए सऊदी अरब की कोशिश थी कि यह प्रांत उसके एजेंटों के  नियंत्रण में रहे।

मारिब में इतने बड़े बदलाव के बावजूद यमनी सेना और स्वयंसेवी बलों ने इस बारे में अपनी विस्तृत रिपोर्ट जारी नहीं की है जिससे पर्यवेक्षकों को लगता है कि प्रांत में पूरी तरह विजय नज़दीक है जिसके बाद यमनी सेना और अंसारुल्लाह आंदोलन की ओर से इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट जारी की जाएगी, एसा पहले भी हो चुका है।

अलअख़बार ने सऊदी गठबंधन के क़रीबी सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अंसारुल्लाह और यमनी सेना को मारिब में बहुत बड़ी विजय मिलने वाली है जिसके दूरगामी परिणाम होंगे और युद्ध की पूरी प्रक्रिया पर इसका असर पड़ेगा।

 

सऊदी गठबंधन बड़े पैमाने पर युद्धक विमानों और हवाई हमलों का सहारा ले रहा है लेकिन वह यमनी सेना और स्वयंसेवी बलों की प्रगति रोक नहीं पा रहा है।

मारिब में सऊदी अरब और इमारात द्वारा समर्थित धड़ा कई गुटों में बंट गया है और आपस में एक दूसरे पर हमले कर रहा है। एक गुट पूर्व राष्ट्रपति मंसूर हादी से जुड़ा हुआ है जिन्होंने सऊदी अरब में शरण ले रखी है। एक गुट का नेतृत्व सग़ीर बिन अज़ीज़ नाम के यमनी नेता के हाथ में है। यह दोनों गुट सऊदी अरब के इशारे पर काम करते हैं। अली मोहसिन अलअहमर नामक नेता के नेतृत्व में एक संगठन सक्रिय है जो चरमपंथी संगठन है। इसे अरब इमारात का समर्थन हासिल है। अलइसलाह पार्टी का भी एक छापामार संगठन है। इसके अलावा कुछ क़बीले हैं जो सऊदी अरब और इमारात के इशारे पर जंग कर रहे हैं। इनमें मुराद और उबैदा नामक क़बीले प्रमुख हैं मगर इन क़बीलों ने हाल ही में अंसारुल्लाह आंदोलन से कुछ सहमति की है।

एक और चरमपंथी संगठन है जिसका नेतृत्व यहया अलहजूरी नामक व्यक्त करता है।

दक्षिणी यमन के इलाक़ों के कुछ एजेंट भी हैं जिन्होंने सऊदी अरब से पैसे लेकर युद्ध में शामिल होने की हामी भरी है मगर सऊदी अरब से उनका बात बात पर विवाद हो जाता है।

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