27 साल बाद लेबनान की यात्रा में हनिया के लक्ष्य
फ़िलिस्तीन के हमास संगठन के राजनैतिक कार्यालय के प्रमुख इस्माईल हनिया 27 साल बाद मंगलवार को लेबनान पहुंचे।
ज़ायोनी शासन ने सन 1992 में हमास द्वारा एक इस्राईली सैनिक की हत्या के कारण इस्माईल हनिया समेत हमास के 415 नेताओं व कमांडरों को लेबनान निर्वासित कर दिया था लेकिन ये लोग सीमावर्ती पट्टी के क़रीब एक मरुस्थल में ही जा कर ठहर गए थे और बैरूत नहीं गए थे जिसके चलते इस्राईल पर बहुत ज़्यादा अंतर्राष्ट्रीय दबाव पड़ा था और वह एक साल बाद इन सभी लोगों को फ़िलिस्तीन वापस आने की अनुमति देने पर मजबूर हो गया था। लेबनान की सीमावर्ती पट्टी पर स्थित निर्वासन स्थल से वापसी के 27 साल बाद अब हनिया बैरूत पहुंचे हैं।
हनिया का बैरूत का दौरा उन विदेशी परिवर्तनों के परिप्रेक्ष्य में हो रहा है जो फ़िलिस्तीन की सुरक्षा व उसके हितों के ख़िलाफ़ हैं। हमास ने कहा है कि हनिया गुरुवा को बैरूत में आयोजित होने वाली फ़िलिस्तीनी गुटों की काॅन्फ़्रेंस में भाग लेने के लिए बैरूत गए हैं। सेंचुरी डील और इमारात व इस्राईल के बीच संबंध स्थापना का समझौता, हनिया की बैरूत यात्रा के मुख्य कारण हैं। जनवरी के महीने में अमरीकी राष्ट्रपति ने सेंचुरी डील के नाम से जो साज़िश पेश की है उसका एक अहम बिंदु विदेशों में रह रहे फ़िलिस्तीनियों के स्वदेश वापसी के हक़ को समाप्त करना है।
लेबनान, पश्चिमी एशिया के अरब देशों में से एक है जिसने सन 1948 से लेकर अब तक फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के एक भाग की मेज़बानी की है। लेबनान में फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के 12 कैम्प हैं जिनमें लगभग सवा दो लाख फ़िलिस्तीनी रहते हैं जबकि क़रीब पौने तीन लाख इन कैम्पों से बाहर रहते हैं। हनिया के बैरूत दौरे के बारे में हमास की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि इस दौरे का एक लक्ष्य, फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों की सामाजिक व मानवीय स्थिति को बेहतर बनाना और इसी तरह उन लोगों की वापसी की राह समतल करना है जो अपने शहरों व देहातों में लौटना चाहते हैं। इस प्रकार फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों को स्वदेश वापस न लौटने देने वाली सेंचुरी डील की अनदेखी करना, हनिया की बैरूत यात्रा का एक लक्ष्य है।
हनिया की बैरूत यात्रा का और एक लक्ष्य इमारात और इस्राईल के बीच हुए शर्मनाक समझौते के परिणामों के मुक़ाबले में फ़िलिस्तीनी व लेबनानी गुटों के बीच सर्वसम्मति पैदा करना है। 13 अगस्त को ट्रम्प ने इस्राईल व इमारात के बीच संबंध स्थापना के समझौते की सूचना दी थी जिसके बाद दोनों पक्षों ने टेलीफ़ोन पर कई बार वार्ताएं की और गत सोमवार को इस्राईल का पहला व्यवसायिक विमान सऊदी अरब की वायु सीमा से गुज़र कर अबू धाबी हवाई अड्डे पर उतरा था। इस विमान में अमरीकी राष्ट्रपति के दामाद और सलाहकार जेरेड कूश्नर और इस्राईल व अमरीका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार भी मौजूद थे।
संयुक्त अरब इमारात के इस क़दम का एक नतीजा विभिन्न फ़िलिस्तीनी गुटों और इसी तरह पश्चिमी एशिया के क्षेत्र में प्रतिरोधकर्ता के बीच एकजुटता व सर्वसम्मति पैदा होना है। हमास के नेता इस्माईल हनिया का बैरूत का दौरा इस एकजुटता व सर्वसम्मति को भी दर्शाता है और साथ ही इससे इमारात व इस्राईल के समझौते के विरुद्ध किए जाने वाले प्रयासों की मज़बूती का भी पता चलता है। फ़िलिस्तीनी व प्रतिरोधकर्ता गुटों की एकजुटता किसी भी अन्य अरब देश को इस्राईल के साथ समझौता करने से पहले कई बार सोचने पर मजबूर कर देगी। (HN)
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