फ़िलिस्तीनी व लेबनानी प्रतिरोध एक मोर्चे में, इस्राईल को गहरी चिंता
हमास के राजनैतिक कार्यालय के प्रमुख इस्माईल हनिया ने बैरूत में फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधकर्ता गुटों के महासचिवों की बैठक में इमारात व इस्राईल के बीच संबंध सामान्य होने पर कहा था कि यह, इतिहास व भुगोल की रेखाओं के पीछे उतरना है।
हमास के शिष्टमंडल की बैरूत यात्रा ने एक बार फिर लेबनान व फ़िलिस्तीन के एक दूसरे के कंधे से कंधा मिला कर किए जाने वाले ऐतिहासिक संघर्ष की गहराई की तरफ़ लोगों का ध्यान मोड़ दिया है। दूसरी ओर लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन के महासचिव सैयद हसन नसरुल्लाह और फ़िलिस्तीन के इस्लामी प्रतिरोध संगठन हमास के राजनैतिक कार्यालय के प्रमुख इस्माईल हनिया की मुलाक़ात ने फ़िलिस्तीन के ख़िलाफ़ प्रत्यक्ष व परोक्ष साज़िशों के मुक़ाबले में फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के समर्थन को उजागर कर दिया। इस यात्रा में फ़िलिस्तीनी व लेबनानी प्रतिरोध की एकजुटता ने एक ऐसा चित्र दिखाया है जिसकी फ़िलिस्तीनी राष्ट्र को इन दिनों विशेष कर ज़ायोनी शासन के साथ इमारात के शर्मनाक समझौते के बाद बहुत ज़्यादा ज़रूरत है।
सैयद हसन नसरुल्लाह से इस्माईल हनिया की मुलाक़ात उन सभी लोगों का जवाब है जो फ़िलिस्तीन के मामले को भुलाए जाने, ज़ायोनी शासन से संबंध स्थापित करने और इस्राईल के सामने सिर झुकाने की आशा रखते हैं। प्रतिरोध, राख के नीचे दबी हुई चिंगारी है और जो लोग फ़िलिस्तीनी काॅज़ की मदद करना चाहते हैं वे भौगोलिक, धार्मिक व राष्ट्रीय सीमाओं को लांघ जाते हैं क्योंकि इस्राईल के लालच व अमरीका की नीतियों के कुछ अहम पहलू हैं जो फ़िलिस्तीन की सीमाओं से इतर हैं और उनका पहला लक्ष्य, प्रतिरोध के मोर्चे को कमज़ोर बना कर ख़त्म कर देना है।
हमास के राजनैतिक कार्यालय के प्रमुख की बैरूत यात्रा और सैयद हसन नसरुल्लाह से उनकी मुलाक़ात, फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध के साथ लेबनान के खड़े होने और फ़िलिस्तीनी काॅज़ के प्रति उसके असीम समर्थन पर बल है। यह यात्रा लेबनान व प्रतिरोध के अत्यंत संवेदनशील समय में हुई है क्योंकि कई देश और दुश्मन पक्ष लेबनान के प्रतिरोध को निरस्त्र करने और लेबनान की राजनैतिक स्वाधीनता को ख़त्म करने की कोशिश कर रहे हैं। इस्राईल की अवैध क़ब्ज़ा करने वाली सरकार और इसी तरह साम्राज्यवादी शक्तियों के पिट्ठुओं के मुक़ाबले में, जो इस्राईल से संबंधों की स्थापना को अपनी कुर्सी बचे रहने की गारंटी समझते हैं, इस यात्रा ने फ़िलिस्तीनी व लेबनानी प्रतिरोध के संघर्ष के संयुक्त संकल्प, संयुक्त हथियार और संयुक्त भविष्य पर बल दिया है। (HN)
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