क्या अमरीका, इराक़ में अपना दूतावास बंद कर देगा?
पिछले एक दो दिन से अमरीका के कुछ सूत्र बता रहे हैं कि वाॅशिंग्टन ने बग़दाद में अपने दूतावास को बंद करने का फ़ैसला कर लिया है लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
इराक़ की हालिया घटनाओं और एक ओर अमरीका द्वारा इराक़ के स्वयं सेवी बल को सीमित करने पर ध्यान केंद्रित किए जाने के दृष्टिगत और दूसरी तरफ़ इराक़ के प्रतिरोधकर्ता गुटों से अमरीका के खुल्लम खुल्ला संघर्ष पर ध्यान देते हुए ऐसा लगता है कि बग़दाद में अमरीकी दूतावास बंद करने का प्रचार, इराक़ के प्रतिरोधकर्ता गुटों के ख़िलाफ़ मानसिक युद्ध का एक भाग है ताकि इन गुटों पर अधिक दबाव डाला जा सके जो अपने देश में अमरीका की उपस्थिति के कड़े विरोधी हैं।
बग़दाद में अमरीकी दूतावास बंद करने की घोषणा का इराक़ी प्रतिरोधकर्ता गुटों पर दूतावासों और कूटनयिक केंद्रों पर हमले के आरोपों का आपस में कोई लेना देना नहीं है लेकिन पिछले कई महीनों से अमरीकी मीडिया इन दो विषयों को जोड़ कर और बढ़ा चढ़ा कर पेश कर रहा है। अब अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव के अवसर पर इसे ट्रम्प के पक्ष में मत विभाजन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस प्रचारिक नीति के संबंध में कई स्थितियों की संभावना हो सकती है। सबसे पहले तो यह कि अमरीका, यह घोषणा कर दे कि वह अपना दूतावास बंद कर रहा है और इराक़ी अधिकारी उसके इस फ़ैसले का विरोध करें। इस स्थिति में वाइट हाउस इराक़ी सरकार के विरोध को, इस देश में अपनी लोकप्रियता समझेगा। दूसरी स्थिति यह हो सकती है कि अमरीका, अपना दूतावास बंद न करे लेकिन इसकी रट लगाए रहे और इस स्थिति में वह इराक़ में अपनी उपस्थिति जारी रखने के लिए इराक़ सरकार से कुछ विशिष्टताएं मांग सकता है जिनमें प्रतिरोधकर्ता बलों पर दबाव डालना शामिल है। तीसरी स्थिति यह हो सकती है कि वह ट्रम्प, चुनाव में जीतने और इराक़ में सैन्य उपस्थिति के अमरीकी विरोधियों को जीतने से रोकने के लिए बग़दाद में अमरीकी दूतावास बंद कर दें। इन तीनों परिस्थितियों में मुख्य रूप से फ़ायदा ट्रम्प को ही हासिल होगा।
अगर यह ख़बर सही हो कि अमरीकी राजदूत पिछली रात, दूतावास को छोड़ कर अरबील में अमरीकी वाणिज्य दूतावास में चले गए हैं तो इसे अमरीका की ओर से इराक़ के लिए एक धमकी भरा संदेश समझा जा सकता है कि अगर उसने वाॅशिंग्टन की मांगों को पूरा न किया तो अमरीका, अरबील को बग़दाद के विकल्प के रूप में मान्यता दे सकता है। यह ऐसी स्थिति में है कि वह इस प्रकार की धमकी पहले भी दे चुका है लेकिन क्या वह इस तरह की धमकी देकर अपने दृष्टिगत हित हासिल कर पाएगा? अतीत का अनुभव इस संभावना को नकार देता है। (HN)
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