सऊदी अरब में नेतनयाहू के स्वागत की भव्य तैयारियां!
अमेरिका के राष्ट्रपति पद के चुनाव के समाप्त होते ही सऊदी अरब के अधिकारियों द्वारा दिए गए बयानों के अनुसार यह बात सामने आई है कि रियाज़ ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री नेतनयाहू के सऊदी अरब दौरे की भव्य तैयारियों में जुट गया है। इस दौरे के होते ही आले सऊद शासन ज़ायोनी शासन के साथ अपने संबंधों की आधिकारिक घोषणा भी कर देगा।
समाचार एजेंसी तसनीम ने अरबी भाषा के प्रसिद्ध समाचार पत्र रायुल यौम के हवाले से रिपोर्ट दी है कि, अमेरिका का 2020 का राष्ट्रपति चुनाव डोनल्ड ट्रम्प को मिली शर्मनाक हार और उनके डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन को मिली जीत के साथ समाप्त हो गया है। यह बात भी पूरी तरह सच है कि ज़ायोनी शासन और अरब देशों के बीच आधिकारिक तौर पर स्थापित होने वाले संबंध और षड्यंत्रकारी समझौते ट्रम्प के हाथों अंजाम पाए हैं, लेकिन इस बात की उम्मीद की जा रही है कि यह सिलसिला बाइडेन के राष्ट्रपति कार्यकाल में वैसे ही आगे बढ़ता रहेगा। जबकि स्वयं सऊदी अरब ने बहरैन, संयुक्त अरब इमारात और सूडान द्वारा इस्राईल के साथ आधिकारिक तौर पर स्थापित किए गए संबंधों के एलान के बाद यह घोषणा की थी कि वह इस बारे में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव की समाप्त के बाद कोई निर्णय लेगा। अब जबकि अमेरिका के चुनाव समाप्त हो गए हैं इस समय सबकी नज़रें सऊदी अरब पर टिकी हुईं हैं कि वह बैतुल मुक़द्दस पर क़ब्ज़ा करने वाले शासन के संबंध में अपने स्टैंड का एलान कब करते हैं।
इस बारे में अमेरिका के वाशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी ने रिपोर्ट दी है कि, सऊदी अरब और इस्राईल के बीच ख़ुफ़िया संबंधों का होना वर्ष 2015 में पश्चिमी एशिया के लिए बहुत बड़ी बात थी। लेकिन अब इन दो शासनों के बीच संबंधों को लेकर कोई बात किसी से ढकी-छिपी नहीं है, बल्कि अब तो रियाज़, इस्राईल के प्रधानमंत्री नेतनयाहू की संभावित सऊदी अरब यात्रा के लिए भव्य तैयारियां कर रहा है। वाशिंगटन इंस्टीट्यूट फॉर नियर ईस्ट पॉलिसी की रिपोर्ट के मुताबिक़, तेलअवीव और रियाज़ के बीच सीधे तौर पर समन्वय पाया जाता है और अब इसको साबित करने की आवश्यकता भी नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में तेलअवीव को लेकर रियाज़ के दृष्टिकोण में साफ़-साफ़ अंतर देखा जा सकता है। जहां कुछ साल पहले तक सऊदी अरब ज़ायोनी शासन को अपना दुश्मन बताता था वहीं अब वह उसे अपने एक मज़बूत सहयोगी मानता है। इसी तरह दोनों का मानना है कि उनके हित और उनका उद्देश्य एक ही है। तेलअवीव के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दोनों का मानना है कि उनका एक संयुक्त दुश्मन है जिससे दोनों को ख़तरा है और वह है ईरान। (RZ)