जनरल सुलैमानी के मीज़ाइलों से इस तरह थर्रा रहे थे इस्राईली....
फ़िलिस्तीन के जेहादे इस्लामी आंदोलन के महासचिव का कहना है कि शहीद जनरल क़ासिम फ़िलिस्तीनियों के सामरिक मुद्दे पर विशेष ध्यान देते थे और ईरान ने कभी भी फ़िलिस्तीनियों की मदद से हाथ नहीं खींचा।
जेहादे इस्लामी आंदोलन के महासचिव ज़ियाद नोख़ाला ने अलआलम से बात करते हुए कहा कि शहीद जनरल क़ासिम सुलैमानी इस बात पर बहुत ध्यान देते थे कि फ़िलिस्तीनी संघर्षकर्ता, युद्ध के अनुभव हासिल करें और नये नये हथियार बनाएं।
उनका कहना था कि शहीद जनरल क़ासिम उचित समय और उचित जगह के लिए बहुत ही बेहतरीन व्यक्ति थे। उनका कहना था कि अधिकृत बैतुल मुक़द्दस हमेशा से जनरल क़ासिम सुलैमानी के मन की शांति का कारण रहा और उनका क्षेत्र में जितने भी संघर्ष उन्होंने किया सबमें उनका क़िबला हमेशा से बैतुल मुक़द्दस ही रहा है क्योंकि उनका लक्ष्य, प्रतिरोध की रक्षा करना था।
जेहादे इस्लामी के महासचिव ने बल देकर कहा कि ग़ज़्ज़ा के प्रतिरोध ने जितनी भी कामयाबियां हासिल की हैं वह सब जनरल क़ासिम सुलैमानी के प्रयासों का परिणाम थीं।
ज़ियाद नोख़ाला ने कहा कि जनरल क़ासिम सुलैमानी की मुख्य रणनीति, ग़ज़्ज़ा पट्टी में हथियारों और मीज़ाइलों को पहुंचाना था, यह एक चमत्कार की भांति था क्योंकि यह मामला सुरक्षा, तकनीक और संभावनाओं की दृष्टि से बहुत ही कठिन और ख़र्चीला था लेकिन आख़िरकार यह काम हुआ और उन्होंने इस बारे में बहुत कोशिशें कीं।
जेहादे इस्लामी आंदोलन के महासचिव ज़ियाद नोख़ाला ने कहा कि उन्होंने कुछ देशों की यात्राएं करके ग़ज़्ज़ा के लिए हथियार भेजने के मुद्दे को अंतिम रूप दिया और आख़िरकार यह काम हुआ।
उनका कहना था कि मैं यह कहना चाहता हूं कि ग़ज़्ज़ा पट्टी पहुंचने वाले मीज़ाइल, वही मीज़ाइल थे जो तेल अवीव पर बरसे थे। (AK)
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