सऊदी अरब के अपराधों के कारण 80 हज़ार यमनी शहीद
सऊदी अरब के हमलों के दौरान 1083 ट्रक और टैंकर, 4490 रास्ते और पुल और 7229 दूसरे वाहनों को ध्वस्त कर दिया गया।
यमन के परिवहन मंत्रालय ने बताया है कि 6 वर्षों से सनआ के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बंद होने के कारण 80 यमनी नागरिक शहीद हो गये। समाचार एजेन्सी इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार यमनी सरकार के परिवहन मंत्रालय और उससे संबंधित संस्थाओं ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि सऊदी अरब के हमलों, परिवेष्टन और 6 वर्षों से सनआ के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बंद होने के कारण हालिया 6 वर्षों के दौरान 80 हज़ार यमनी शहीद हुए हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बहुत से यमनी नागरिकों को तुरंत उपचार की आवश्यकता थी परंतु सनआ के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के बंद होने के कारण उन्हें बाहर स्थानांतरित नहीं किया जा सका। इसी प्रकार यमनी परिवहन मंत्रालय की रिपोर्ट के एक भाग में आया है कि सऊदी अरब के हमलों के दौरान 1083 ट्रकों और टैंकरों, 4490 रास्तों व पुलों और 7229 दूसरे वाहनों को ध्वस्त कर दिया गया।
इस रिपोर्ट में आया है कि जो भी बीमार उपचार कराने के लिए विदेश जाने पर बाध्य हैं जब वे सनआ से अदन जाते हैं तो 10 में से एक बीमार की रास्ते में ही मौत हो जाती है। ज्ञात रहे कि अदन का हवाई अड्डे सऊदी अरब की कठपुतली सरकार के नियंत्रण में है।
टिप्पणीः
26 मार्च 2015 को सऊदी अरब ने सुरक्षा परिषद की अनुमति के बिना यमन पर हमला आरंभ किया था और अब इस हमले को सातवां साल आरंभ हो चुका है। इन हमलों के दौरान हज़ारों यमनी हमेशा- हमेशा के लिए मौत की नींद सो चुके हैं मगर मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वाले देश और संस्थायें सब इस प्रकार से चुप्पी साधे हुए हैं कि मानो यमन में कुछ हो ही नहीं रहा है। इन देशों व संस्थाओं की चुप्पी से हमला करने वाले देश को प्रोत्साहन मिल रहा है क्योंकि दूसरे शब्दों में यह अर्थपूर्ण चुप्पी एक प्रकार का समर्थन ही है।
यमन में मारे जाने वालों में सबसे अधिक संख्या महिलाओं और बच्चों की है मगर मानवाधिकार की रक्षा का दम भरने वालों की कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है और अगर यमन के बजाये अमेरिका की हां में हां मिलाने वाला कोई दूसरा देश होता तो कब के ये हमले बंद हो चुके होते बल्कि सऊदी अरब हमला ही न करता क्योंकि अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों के समर्थन और आशीर्वाद के बिना उसके अंदर एसा करने की हिम्मत ही नहीं है।
बहरहाल यमनी जनता की हत्या के लिए वे देश भी बराबर के दोषी हैं जो न केवल सऊदी अरब की भर्त्सना नहीं कर रहे हैं बल्कि उसे हथियार भी दे रहे हैं। कितनी अजीब बात है कि आज भी बहुत से मुसलमान बेगुनाह मुसलमानों का खून बहाने वाले सऊदी अरब को ख़ादेमुल हरमैन शरीफैन यानी पवित्र नगर मक्का और मदीना का सेवक समझते हैं। MM
हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए
हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन कीजिए
हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!