यमन जंग के दलदल से निकलने के लिए छटपटाता सऊदी अरब
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सत्ता में भागीदारी के समझौते में यमन की तबाह करने वाली जंग के मुख्य खिलाड़ियों को, वार्ता की मेज़ पर जगल मिले जिसमें देश के संसाधनों पर सबकी पहुंच बराबर हो
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr ०५, २०२१ १७:२० Asia/Kolkata
  • यमन जंग के दलदल से निकलने के लिए छटपटाता सऊदी अरब

सत्ता में भागीदारी के समझौते में यमन की तबाह करने वाली जंग के मुख्य खिलाड़ियों को, वार्ता की मेज़ पर जगल मिले जिसमें देश के संसाधनों पर सबकी पहुंच बराबर हो

यमन जंग से निकलने के लिए छटपटाता सऊदी अरब

सत्ता में भागीदारी के समझौते में यमन की तबाह करने वाली जंग के मुख्य खिलाड़ियों को, वार्ता की मेज़ पर जगल मिले जिसमें देश के संसाधनों पर सबकी पहुंच बराबर हो

सऊदी अरब की अगुवाई वाला गठबंधन, यमन पर जंग थोप कर, अंसारुल्लाह आंदोलन को पराजय करने का लक्ष्य हासिल करने में न सिर्फ़ यह कि नाकाम रहा बल्कि सऊदी अरब ऐसी पोज़ीशन में पहुंच गया है जो उसे शर्त मानने पर मजबूर कर सकती है।

सऊदी अरब, यमन में हौसियों को हराने और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्य सरकार को गठन के मुख्य लक्ष्य को हासिल करने में नाकाम रहा है।

डेनवर यूनिवर्सिटी में मिडिल ईस्ट स्टडीज़ सेंटर के डायरेक्टर नादिर हाशेमी ने अल्जज़ीरा से कहाः “हौसी, ताक़तवर लड़ने वाली फ़ोर्स साबित हुयी। सऊदी अरब की अपने मुक़ाबिल वाले की तुलना में ज़मीन पर ऐसी पोज़िशन नहीं है कि मुक़ाबला कर सके।  

ताक़त के पलड़े की पोज़ीशन

सऊदी अरब के प्रस्ताव में, यूएन की निगरानी में सीज़फ़ायर की बात है। सीज़फ़ायर या संघर्ष विराम के दौरान, राजनैतिक हल के लिए बातचीत हो। नेक नियत ज़ाहिर करने के लिए सऊदी अरब ने सनआ एयरपोर्ट की नाकाबंदी हटाने और रेड सी पर स्थित हुदैदा बंदरगाह से ईंधन और खाद्य पदार्थ के आयात की पेशकश की।

अमरीका का ख़त्म समर्थन

अंसारुल्लाह आंदोलन की मज़बूत सैन्य पोज़ीशन, सऊदी अरब के लिए एकमात्र पहेली नहीं है। 50 साल से ज़्यादा वक़्त से सऊदी अरब के सबसे अहम घटक अमरीका ने 2015 में तत्कालीन राष्ट्रपति ओबामा के दौर में अमरीकी फ़ोर्सेज़ को सऊदियों को लॉजिस्टिक और इंटेलिजेन्स मदद की इजाज़त दी थी।

मान्चेस्टर मेट्रोपॉलिटन यूनिवर्सिटी में इतिहास, राजनीति और दर्शनशास्त्र संकाय के प्रमुख स्टीवन हर्स्ट के मुताबिक़, “अमरीका ने सऊदियों को टार्गेट चुनने सहित इन्टेलिजेन्स, हथियार और सऊदी फ़ाइटर जेट को हवा में ईंधन भरने जैसी लॉजिस्टिक मदद की, हालांकि यह आख़िरी मदद 2018 के अंत में ख़त्म हो गयी।”

बाइडेन की गतिशीलता से बिन सलमान का नुक़सान

राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 20 जनवरी को शपथ लेने के बाद ही, यमन जंग को अमरीकी समर्थन रोक दिया। उनके नेतृत्व में अमरीका, सउदी अरब को हथियारों से संबंधित सभी सौदों को ख़त्म कर देगा।

शांति का रास्ता क्या है?

अमरीका, यूएन और क्षेत्रीय मध्यस्थ ओमान को अभी भी बातचीत की उम्मीद नज़र आ रही है।

बुधवार को ओमान ने सऊदी अरब और अंसारुल्लाह आंदोलन के बीच बहुत जल्द समझौता होने की उम्मीद जतायी है।

डेनवर यूनिवर्सिटी में मिडिल ईस्ट स्टडीज़ सेंटर के डायरेक्टर नादिर हाशेमी का कहना हैः

यमनियों के बीच ताक़त के बंटवारे का समझौता ज़रूरी है। सभी मुख्य खिलाड़ियों को वार्ता की मेज़ पर जगह मिले और समझौते के तहत सभी खिलाड़ियों को राष्ट्र के संसाधन तक बराबर पहुंच, राजनैतिक प्रतिनिधित्व और मूल सुरक्षा की गारेंटी मिले।

मानव त्रासदी

जब तक यमन मामले में शामिल खिलाड़ी सच्ची बातचीत शुरु नहीं करते उस वक़्त तक यमन की आम जनता इसकी क़ीमत चुकाती रहेगी।

नादिर हाशेमी के मुताबिक़, “बड़ी ताक़तों को यमन में रूचि नहीं है। उसके पास प्राकृतिक संसाधन नहीं हैं, नक़्शे में उसकी भूरणनैतिक स्थिति उनके लिए अहमियत नहीं रखती।”

पिछले 6 साल से इस नज़रिये की पुष्टि होती है। (साभारः अल्जज़ीरा)

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