डिमोना से हैफ़ा तक, इस्राईल में अगला निशाना कहां होगा?
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इस्राईल के भीतर स्थित डिमोना परमाणु संयंत्र के निकट एक सीरियन मिसाइल के गिरने के कुछ ही दिनों के बाद हैफ़ा रिफ़ाइनरी में आग लग गई।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ०२, २०२१ १२:३६ Asia/Kolkata
  • डिमोना से हैफ़ा तक, इस्राईल में अगला निशाना कहां होगा?

इस्राईल के भीतर स्थित डिमोना परमाणु संयंत्र के निकट एक सीरियन मिसाइल के गिरने के कुछ ही दिनों के बाद हैफ़ा रिफ़ाइनरी में आग लग गई।

ज़ायोनी शासन ने हालांकि हैफ़ा रिफ़ाइनरी में लगी आग का कारण यह बताया है कि यह अग्निकांड, सिस्टम के "सीसीआर" पाइप में ख़राबी के कारण हुआ।  ज़ायोनी शासन के अनुसार हैफ़ा की रिफ़ाइनरी को लक्ष्य नहीं बनाया गया।  इसी बीच कुछ हल्क़ों ने हैफ़ा रिफ़ाइनी पर साइबर हमले की संभावना जताई है।  विगत में इस्राईल की जल तथा बिजली आपूर्ति के मूलभूत ढांचे पर साइबर हमले का अनुभव बताता है कि इस्राईल का एक बड़ा भाग अंधेरे में चला गया था।  यही कारण है कि हैफ़ा रिफ़ाइनरी की घटना में साइबर हमले की संभावना को जानकारों ने अनदेखा न करते हुए इसकी प्रबल संभावना जताई है।

यह वास्तविकता है कि हैफ़ा पर हमला, केवल एक रिफ़ाइनरी पर हमला मात्र नहीं था, बल्कि इस कार्यवाही का महत्व इसलिए है कि वहां पर अमोनिया गैस का भण्डार है।  यही कारण है कि इस्राईल इस मामले को एक तकनीकी कमी दिखाकर महत्वहीन दर्शाना चाहता है।  यह वैसा ही है जैसेकि डिमोना के निकट सीरियन मिसाइल के लगने को ज़ायोनियों की ओर से महत्वहीन दर्शाया गया।  बयान में कहा गया कि इस हमले का लक्ष्य, परमाणु प्रतिष्ठान नहीं था।

एक कहावत है कि जिनके घर शीशे के होते हैं वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते।  सीधी बात है कि डिमोना और हैफ़ा में घटने वाली कोई भी घटना इस्राईल के चारों ओर बसे देशों के पर्यावरण को निश्चित रूप से प्रभावित करेगी।  यही कारण है कि ज़ायोनी शासन ने घटना के तुरंत बाद अपने पर्यावरण मंत्री से कहलवाया कि हैफ़ा में होने वाले अग्निकांड से पर्यावरण को कोई ख़तरा नहीं है।  अभी यह तो पता नहीं है कि इस हमले के पीछे किसा हाथ था लेकिन जैसे कि इस पहले भी कई बार हो चुका है कि इस्राईल के अधिकारियों और वहां के संचार माध्यमों ने इसमें ईरान को ख़ींचने का प्रयास नहीं किया बल्कि दोनो घटनाओं में  मात्र एक घटना या तकनीकी कमी तक ही सीमित रखा है।

कहते हैं कि नतंज़ की घटना के कारण नेतनयाहू को आंतरिक स्तर पर और बाहरी स्तर दोनों ओर से फटकार सुननी पड़ी थी।  इसका मुख्य कारण यह है कि इस्राईल और अमरीका दोनों को यह अच्छी तरह से पता है कि ईरान के मुक़ाबले में ज़ायोनी शासन के पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है।  कुछ जानकार जहाज़ों पर हालिया हमलों को ईरान के मुक़ाबले में ज़ायोनी शासन की खुली कमज़ोरी मानते हैं।  हैफ़ा रिफ़ाइनरी में कल रात घटने वाली घटना अगर, ज़ायोनी शासन के शत्रुओं के साइबर युद्ध का एक भाग थी तो फिर यह कहा जा सकता है कि इस्राईल अब अपने द्वारा क्षेत्र में फैलाई गई आग में स्वयं ही फंसता जा रहा है।

इस्राईल के भीतर 230 किलोमीटर के अंदर पहुंचने वाला मिसाइल, इस्राईल के भीतर चार प्रकार के सुरक्षा कवचों को भेदते हुए डिमोना के मात्र कुछ दूरी पर जाकर गिरा था।  अगर इसमें थोड़ा सा ईंधन और बढ़ा दिया जाए तो फिर वह डिमोना को आसानी से अपना लक्ष्य बना सकता है।  इसी प्रकार से इस्राईल की जलापूर्ति एवं बिजली आपूर्ति की व्यवस्था को भी लक्ष्य बनाया जा सकता है।