फ़िलिस्तीन में ख़तरनाक मानव त्रासदी की आशंका, दुनिया ख़ामोश है...
न्यूयॉर्क टाइम्ज़ ने ग़ज़्ज़ा पर इस्राईल के बर्बर हमले से हुयी तबाही का ज़िक्र करते हुए क्षेत्र में मानव त्रासदी मुंह बाए खड़ी है।
इस अख़बार ने ग़ज़्ज़ा पट्टी में दयनीय मानवीय स्थिति पर एक रिपोर्ट में लिखा है कि बड़े पैमाने पर विध्वंस और मरने वाले आम फ़िलिस्तीनियों की बढ़ती तादाद ने ग़ज़्ज़ा के सामने मानवीय चुनौती पैदा कर दी है।
यह ऐसी हालत में है कि ग़ज़्ज़ा पट्टी को इस्राईल की ओर से नाकाबंदी की वजह से पहले ही अनेक मुश्किलों का सामना है।
इस रिपोर्ट में आया है कि ग़ज़्ज़ा पर इस्राईली हमलों में 17 अस्पतालों और क्लिनिकों और कोविड-19 के लैब को नुक़सान पहुंचा है।
इसी तरह ग़ज़्ज़ा पर इस्राईल की अंधाधुंध बमबारी की वजह से सीवर लाइन की गंदगी पानी की पाइप लाइन में जा रही है। इस घटना से 8 लाख लोगों को पीने का साफ़ पानी नसीब नहीं है, जिससे बहुत बड़ा मानवीय संकट खड़ा हो गया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक़, ग़ज़्ज़ा में स्कूल की इमारतों पर इस्राईल की बमबारी की वजह से 6 लाख स्टूडेंट्स पढ़ाई से वंचित हो गए हैं।
यह ऐसी हालत में है कि ज़ायोनी शासन ग़ज़्ज़ा में संघर्ष विराम के लिए अंतर्राष्ट्रीय अपील के बावजूद, फ़िलिस्तीनी जनता के ख़िलाफ़ अपराध कर रहा है।
न्यूयॉर्क टाइम्ज़ अख़बार ग़ज़्ज़ा में मरने वाले आम फ़िलिस्तीनियों की बढ़ती तादाद और इस्राईल के हमलों में मूल रचनाओं को हुए नुक़सान की ओर इशारा करते हुए, जंग से संबंधित अंतर्राष्ट्रीय क़ानून की तेल अबिब की ओर से पाबंदी पर सवाल उठाया है।
अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के तहत सार्वजनिक स्थलों पर हमले वर्जित हैं, लेकिन इस्राईल ने ग़ज़्ज़ा पर हमले में इस क़ानून पर अमल नहीं किया। (MAQ/N)
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