ज़ेड (Z) नस्ल फ़िलिस्तीन को आज़ाद कराएगी
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नई नस्ल ने साबित कर दिखाया कि वह पीछे हटने वाली नहीं है यहाँ तक कि फ़िलिस्तीनियों का दमन ख़त्म हो जाए।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ३०, २०२१ १६:५० Asia/Kolkata
  • ज़ेड (Z) नस्ल फ़िलिस्तीन को आज़ाद कराएगी

नई नस्ल ने साबित कर दिखाया कि वह पीछे हटने वाली नहीं है यहाँ तक कि फ़िलिस्तीनियों का दमन ख़त्म हो जाए।

यह अलग दौर है। समानता और आज़ादी के लिए फ़िलिस्तीनियों का संघर्ष नए चरण में पहुंच गया है।

अतिग्रहित पूर्वी अलक़ुद्स और ग़ज़्ज़ा में फ़िलिस्तीनियों के जीवन और अधिकारों पर इस्राईल के ताज़ा हमलों पर फ़िलिस्तीनियों ने न सिर्फ़ अभूतपूर्व एकता व साहस का प्रदर्शन किया, बल्कि एक दशक के दौरान ऐतिहासिक आम हड़ताल की जिसका हमास और फ़त्ह दोनों ने समर्थन किया।

इसके अलावा, अंतर्राष्ट्रीच मंच पर भी फ़िलिस्तीनियों के साथ उतनी ही एकता नज़र आयी।

सोशल मीडिया पर पूरी दुनिया में हज़ारों की तादाद में लोगों ने फ़िलिस्तीनियों पर इस्राईल के घातक हमलों की #SaveSheikhJarrah और #Gazaunderattack जैसे हैशटैग के साथ निंदा की। हालांकि इस्राईल और सोशल मीडिया कंपनियों की ओर से उन्हें ख़ामोश करने की कोशिश के बावजूद, उन्होंने इस्राईल के अवैध क़ब्ज़े और उसकी ओर से फ़िलिस्तीनियों के मानवाधिकार तथा अंतर्राष्ट्रीय क़ानून के उल्लंघन के बारे में जागरुकता पैदा की।

यह भी पहली बार देखने में आया कि अमरीकी संसद में प्रतिनिधि सभा के कई सदस्यों ने जिसमें रशीदा तालिब और एलेक्ज़ैन्ड्रिया ओकासियो कोर्टेज़ ने सार्वजनिक रूप से इस्राईल को नस्लभेदी सरकार कहा। इस बीच सेनेटर बर्नी सैन्डर्ज़ ने, ग़ज़्ज़ा पर इस्राईल की 11 दिनों तक बमबारी के जवाब में एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें उसे 73 करोड़ 50 लाख डॉलर के हथियारों की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की गयी है। यहाँ तक कि इस्राईल का कट्टर समर्थक समझे जाने वाले न्यूज़ चैनल फ़ॉक्स न्यूज़ के पत्रकार जिराल्डो रिवेरा ने इस्राईल के अपराधों में अमरीका की संलिप्त्ता की भर्त्सना की और इस्राईल को हथियार बेचने पर रोक लगने की उठने वाली मांग का समर्थन किया।

मलाला यूसुफ़ज़ई और फ़ुटबाल खिलाड़ी पॉल पाग्बा सहित अनेक मशहूर हस्तियों ने इस्राईल के नस्लभेदी व्यवहार की निंदा की और अपने अपने मंच को फ़िलिस्तीनियों के न्याय व शांति के लिए जारी संघर्ष के बारे में जागरुकता पैदा करने के लिए इस्तेमाल किया।

विश्व स्तर पर फ़िलिस्तीन के समर्थन का आवेग अस्थायी नहीं लगता। जिस तरह ‘मीटू’ और ‘ब्लैक लाइव्ज़ मैटर’ जैसे सामाजिक न्याय आंदोलन का बढ़ता प्रभाव सामने आया, दुनिया भर में युवा नस्ल अपने देश और विदेश में अन्याय का मुक़ाबला करने के लिए पहले से ज़्यादा सरगर्म है। वे अपने से पहले वाली नस्लों की तुलना में फ़िलिस्तीनियों के संघर्ष का ज़्यादा समर्थन कर रहे और इस्राईल के उस प्रौपैगन्डे की आलोचना कर रहे हैं जो वह अपने अवैध क़ब्ज़े और अमानवीय व ग़ैर क़ानूनी करतूतों के बारे में करता है।

इसका यह मतलब नहीं है कि इस नई नस्ल को फ़िलिस्तीनियों का साथ देने पर कठिनाइयों का सामना नहीं है।

फ़ेसबुक और गूगल जैसी बड़ी कंपनियां अपने अपने प्रभावी प्लेटफ़ार्म से इस्राईल और ज़ायोनीवाद की आलोचना में लिखी जाने वाली बातों को मिटाने के लिए दिन रात एक किए हुए हैं। पिछली नस्लों के विपरीत जिसका फ़िलिस्तीन के संबंध में समर्थन ज़ाहिरी रहा और कभी मज़बूत कार्यवाही का रूप नहीं ले सका, नई नस्ल एकता का खोखला नारा लगाने से कहीं ज़्यादा काम कर रही है। नई नस्ल न सिर्फ़ यह कि ऐन्टी सेमिटिक बयानबाज़ियों से निपट रही है, बल्कि फ़िलिस्तीनियों को अमानवीय दिखाने वाले इस्राईली प्रोपैगन्डे के ख़िलाफ़ भी काम कर रही है। नई नस्ल अपनी अपनी सरकारों से मांग कर रही है कि वह इस्राईल को बम बेचना रोके क्योंकि वे जानते हैं कि इन बमों से फ़िलिस्तीनी नागरिक मारे जाएंगे।

फ़िलिस्तीनियों पर इस्राईल का ताज़ा हमला सीज़ फ़ायर के रूप में ख़त्म हुआ लेकिन फ़िलिस्तीनी संघर्ष ख़त्म नहीं हुआ है। आज नई नस्ल के अन्याय और दमन के ख़िलाफ़ संघर्ष ने जो इसे अपना फ़र्ज़ समझ रही है, पहले से ज़्यादा इस बात की उम्मीद जगायी है कि आज़ादी और न्याय तक फ़िलिस्तीनी जनता की पहुंच अब दूर नहीं रह गयी।

(साभारः अल-जज़ीरा)

यह विचार ट्यूनीशिया के लेखक व बुद्धिजीवी हैसम क़ासेमी के हैं।

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