अंसारुल्लाह ने जंग, सऊदी अरब के अंदर क्यों पहुंचा दी?
यमनी सेना और स्वयं सेवी बलों ने सऊदी अरब के अंदर जीज़ान के इलाक़े में अपनी विशेष सैन्य कार्यवाही के जो चित्र जारी किए हैं, वे बड़ी उपलब्धियों को दर्शाते हैं। इसी तरह ये चित्र सऊदी और हमलावर गठजोड़ के पिट्ठू मीडिया के उन प्रोपेगंडों का करारा जवाब भी हैं जो बार बार यह दावा कर रहे हैं कि यमनी बलों की उपलब्धियां वास्तविक नहीं हैं।
टीकाकारों का कहना है कि इस सैन्य अभियान के अनेक राजनैतिक, सामरिक व सामाजिक पहलू हैं। इस अर्थ में कि इस अभियान के, सैन्य संदेश के अलावा राजनैतिक व सामाजिक संदेश भी हैं। इस अभियान में जो विजेता रहा है, वह घेराबंदी में मौजूद यमनी राष्ट्र है जिसका संकल्प फ़ौलादी है। यमनी अधिकारियों ने कहा है कि इस देश की सेना ने सऊदी अरब की सेना का घमंड चकनाचूर कर दिया है। यमनी जियालों ने सऊदी अरब के अंदर घुस कर जीज़ान में अपनी सैन्य उपलब्धियों से प्रतिरोध का एक बेजोड़ नमूना पेश किया है।
टीकाकारों का मानना है कि इस सैन्य अभियान में एक अहम बिंदु यह है कि विश्व समुदाय की राय बदलती जा रही है जो सऊदी अरब का समर्थन कर रहा था। यमन के ख़िलाफ़ सात साल से जारी सऊदी अरब की जंग ने यह दिखाया है कि सऊदी सेना कमज़ोर और ढीली है। यमन की सेना ने सऊदी सेना पर कड़े सामरिक, आर्थिक व राजनैतिक प्रहार किए हैं। इससे पता चलता है कि सनआ की राजनैतिक व्यवस्था और सेना व अंसारुल्लाह संगठन अपने लक्ष्य पूरे करते रहेंगे। सऊदी अरब, अमरीका व इस्राईल, आर्थिक या राजनैतिक क्षेत्र में जितने भी हमले करते रहें, वे यमनी क्रांति को, सऊदी पिट्ठुओं द्वारा क़ब्ज़ा किए गए इलाक़ों को आज़ाद कराने से नहीं रोक सकते।
यमन के अधिकारियों का कहना है कि सऊदी अरब के अंदर घुस कर इस लिए हमला किया गया है ताकि सऊदी सरकार को राजनैतिक प्रक्रिया व वार्ता की मेज़ पर लौटने पर मजबूर किया जा सके। सैन्य शक्ति के समीकरण में जो बदलाव आया है, वह निश्चित रूप से भविष्य में हर राजनैतिक प्रक्रिया पर अपना प्रभाव डालेगा। यमनी अधिकारियों ने कहा है कि अब सऊदी अरब और उसके युवराज मुहम्मद बिन सलमान की हेकड़ी निकलती जा रही है। अब उन्हें यमन के नेताओं के प्रतिरोध और ताक़त और इसी तरह यमनी सेना व स्वयं सेवी बल की बहादुरी और मीज़ाइली ताक़त का अंदाज़ा हो गया है।
अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र संघ सीरिया की सरकार पर तो यह आरोप लगाता है कि वह सीरिया के कुछ इलाक़ों में कुछ शरणार्थियों व उनके परिवारों के बारे में अंतर्राष्ट्रीय संगठनों की बात नहीं मान रही है, लेकिन वही राष्ट्र संघ सऊदी अरब के बारे में यह रवैया नहीं अपनाता जिसने यमनी राष्ट्र का घेराव कर रखा है और यमन के लोगों पर विभिन्न प्रकार के मीज़ाइलों से हमला कर रहा है। टीकाकारों का कहना है कि अस्ल में विश्व समुदाय यह नहीं चाहता कि यमन में अंसारुल्लाह संगठन, सत्ता में आए। इस बात ने विश्व समुदाय और सऊदी गठबंधन में शामिल देशों को चिंतित कर रखा है।
दूसरी तरफ़ विश्व समुदाय, प्रतिरोध के मोर्चे की विजयों से भी अप्रसन्न है और शायद जब अंसारुल्लाह सऊदी अरब के कुछ बड़े अहम और रणनैतिक लक्ष्यों पर व्यापक हमले करेगा तभी जा कर हमलावर गठजोड़, यमन के ख़िलाफ़ अपनी शत्रुतापूर्ण नीतियों से पीछे हटेगा। (HN)
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