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अकेले दौड़कर पहले स्थान पर आना चाहती हैं आजकल की सरकारें! लोकतंत्र का दावा करने वाले केवल सरकारी तंत्र के हैं सहारे
Oct १७, २०२३ १६:०९आजकल अगर पूरी दुनिया पर नज़र डाली जाए तो शायद ही कुछ देश ही मिलेंगे कि जहां सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था से चल रही है। नहीं तो ज़्यादातर देशों और राज्यों की स्थिति देखने से पता चलता है कि वहां की सरकारें केवल और केवल सरकारी तंत्र और बल के सहारे ही अपना काम कर रही होती हैं। उदाहरण के तौर पर देश का संविधान यह कहता है कि अगर कोई शांति के साथ अपनी मांगों को लेकर विरोध-प्रदर्शन करना चाहता है तो उसको इस बात की पूरी आज़ादी होगी। लेकिन ज़मीन पर बिल्कुल ऐसा नहीं है।
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दक्षिणी लेबनान में सीमावर्ती इलाक़े में ज़ायोनी सेना और हिज़्बुल्लाह के बीच झड़पें जारी हैं।
Oct १७, २०२३ १६:०४इस्राईली मीडिया ने बताया कि ज़ायोनी सेना ने दक्षिणी लेबनान में कई स्थानों पर हमले किए जबकि इससे पहले ज़ायोनी सीमावर्ती बस्ती में सैनिक ठिकानों पर हिज़्बुल्लाह ने सटीक निशाना लगाने वाले राकेटों से हमले किए थे जिनमें कई सैनिक हताहत व घायल हुए।
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ग़ज़्ज़ा के क़रीब तैनात सैनिकों से मिलने पहुंचे बिनयामिन नेतनयाहू को उनके सामने कमांडर ने दी गालियां
Oct १७, २०२३ १५:५६ग़ज़ा के क़रीब तैनात सैनिकों से मुलाक़ात के पहुंचे ज़ायोनी शासन के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू को एक सैनिक ने उनके सामने गालियां दी और उन्हें पक्का झूठा बताया जिसके बाद उनकी स्पीच का कार्यक्रम रद्द हो गया।
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ग़ज़्ज़ा की मज़लूम जनता के समर्थन में आगे आए दुनिया के कलाकार, भारत पाकिस्तान के कलाकारों ने भी उठाई आवाज़
Oct १७, २०२३ १४:४७फ़िलिस्तीन की मज़लूम जनता के पक्ष में जहां अलग अलग वर्ग और आम जनता सड़कों पर निकल रही है वहीं कलाकारों ने भी ग़ज़ा के मज़लूमों के समर्थन में आवाज़ उठाई है।
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ग़ाज़ा की दुकानों में सिर्फ़ चार दिन का राशन बचा हैः संयुक्त राष्ट्र
Oct १७, २०२३ १३:३०संयुक्त राष्ट्र संघ के वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम ने कहा है कि ग़ाज़ा पट्टी स्थिति बहुत तेज़ी से ख़राब हो रही है जबकि वहां दुकानों में केवल चार या पांच दिन का राशन बचा है।
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फ़िलिस्तीन अभी ज़िन्दा है, अलअक़्सा तूफ़ान ने बहुत सारी तस्वीरों को किया साफ़, एक झटके में नेतन्याहू का सपना हुआ चकनाचूर!
Oct १७, २०२३ १३:२४एक ओर 75 वर्षों से फ़िलिस्तीनी जनता का ख़ून बहाने वाला अवैध आतंकी शासन इस्राईल है और दूसरी ओर सात दशक पहले दर-दर भटक रहे यहूदियों को सिर छिपाने के लिए अपनी जगह देने वाले दयालु, बाहदुर, धैर्यवान और इस समय दुनिया की सबसे पीड़ित फ़िलिस्तीनी जनता है। हंसी के साथ-साथ शर्म आती है उन नेताओं, पत्रकारों और संस्थाओं पर जो फ़िलिस्तीन के संघर्षकर्ताओं को आतंकवादी और इस्राईली आतंकियों को आत्मरक्षा करने वाले सिपाही बता रहे हैं।
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ग़ज़्ज़ा पर ज़मीन हमला क्यों नहीं कर सका इस्राईल?
Oct १७, २०२३ ०८:५७ज़ायोनी शासन को कल रविवार से ग़ज़्ज़ा के ख़िलाफ़ ज़मीनी युद्ध शुरू करना था लेकिन आख़िरकार उसने यह फ़ैसला स्थगित कर दिया।
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तूफ़ान अल-अक़्सा की तबाही, इस्राईल के कई इलाक़ों में मीसाइलों की बारिश
Oct १७, २०२३ ०८:४४फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधकर्ता बलों ने एक बार फिर इस्राईल के कई इलाक़ों और महत्वपूर्ण केन्द्रों को निशाना बनाया।
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हमास की करारी मार का असर, शाबाक प्रमुख ने अपनी हार मान ली
Oct १७, २०२३ ०८:२८ज़ायोनी शासन के आंतरिक सुरक्षा संगठन शाबाक के प्रमुख रोनिन बार का कहना है कि वह तूफ़ान अल-अक्सा ऑपरेशन में खुफिया विफलता की ज़िम्मेदारी स्वीकार करते हैं।
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ख़ालिद मशअल का बयान, ज़मीनी लड़ाई में भी हम इस्राईल को हरा देंगे
Oct १७, २०२३ ०७:२७विदेश में हमास आंदोलन के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख खालिद मशअल ने कहा कि ज़ायोनी शासन ग़ज़्ज़ा में बच्चों और नागरिकों की हत्या करके सैन्य हार की भरपाई करना चाहता है।