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अरबईन में पवित्र नगर कर्बला जाने वाले श्रद्धालुओं को इराक़ा सरकार का बड़ा तोहफ़ा
Aug १६, २०२३ ०७:२३इराक़ सरकार के मंत्रिपरिषद ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके वफ़ादार साथियों के चेहलुम के मौक़े पर पवित्र नगर कर्बला जाने वाले तीर्थयात्रियों के लिए वीज़ा शुल्क के बारे में नए निर्णय लिए हैं।
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आतंकी गुटों के निशाने पर आख़िर क्यों रहते हैं शिया मुसलमानों के पवित्र स्थल और धार्मिक हस्तियां? वजह जानकर आपको भी होगी हैरानी!
Aug १४, २०२३ १५:४५हर सुबह मीडिया के माध्यम से मिलने वाले समाचारों में आतंकी हिंसा के बारे में कोई बुरी ख़बर ज़रूर होती है। शायद ही कोई दिन ऐसा गुज़रता है जिस दिन दुनिया के किसी न किसी हिस्से में किसी न किसी आतंकी घटना में लोगों की बलि न चढ़ती हो। दरअसल आतंकवाद, युद्ध का एक नया रूप हो गया है जो किसी सीमा को नहीं मानता और जिसका कोई स्पष्ट चेहरा भी नहीं होता। यह आतंकवाद आधुनिक तकनीक के साथ जुड़कर दुनिया में क़हर बरपा कर रहा है। साथ ही दुनिया में सबसे ज़्यादा आतंकवाद की अगर कोई बलि चढ़ा है तो वह हैं शिया मुसलमान।
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आख़िर इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चाहने वालों को क्यों नहीं लगता डर? हज़रत ज़ैनब ने किस लिए खाई थी सौगंध?
Aug १४, २०२३ १३:४३जैसे-जैसे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके वफ़ादार साथियों का चेहलुम क़रीब आ रहा है वैसे-वैसे हुसैनियों के दिलों की धड़कनें तेज़ी होती जा रही हैं। यह ऐसा मौक़ा है कि इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम से श्रद्धा रखने वाला हर व्यक्ति यह चाहता है कि वह अरबईन के दिन पवित्र नगर कर्बला में मौजूद रहे। पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पवित्र परिजनों के कथनों में बताया गया है कि मोमिन की एक निशानी, अरबईन की ज़ियारत है।
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क्या आप जानते हैं कि आशूरा का आंदोलन क्यों अमर हो गया? अरबईन के मौक़े पर कर्बला में ऐसा क्या दिखता है कि जिसका बयान करना असंभव है!
Aug ०६, २०२३ १२:४३जैसे-जैसे इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का चेहलुम क़रीब आता है, उनके चाहने वालों में एक विशेष प्रकार का जोश और जज़्बा जागने लगता है। पैग़म्बरे इस्लाम (स) के पवित्र परिजनों के कथनों में बताया गया है कि मोमिन की एक निशानी, अरबईन की ज़ियारत है। इमाम हुसैन के चेहलुम के दिन करबला में उपस्थिति का अपना एक विशेष महत्व है। इस दिन करबला में जो चीज़ दिखाई देती है उसका बयान करना संभव ही नहीं। क्योंकि उसको देखने के लिए अरबईन के मौक़े पर कर्बला में होना और अपनी आंखों से देखना ज़रूरी है।
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हुसैनियों ने बनाया नया रिकॉर्ड, आशूरा में यह हाल है तो अरबईन में क्या होगा? +वीडियो
Jul ३०, २०२३ १२:२२इराक़ी संसद सेवा आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा है कि 10 मुहर्रम को एक करोड़ 60 लाख इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के अज़ादारों ने पवित्र नगर कर्बला में प्रवेश किया। जो अपने आप में एक नया रिकॉर्ड है।
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आशूरा का दिन, इमाम हुसैन (अ) के क़ब्र की मिट्टी, जो देखते ही देखते ख़ून में बदल गई+ वीडियो
Jul २९, २०२३ १५:४०इस समय पूरी दुनिया हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके वफ़ादार साथियों के ग़म में डूबी हुई है। कहीं शुक्रवार तो कहीं शनिवार को मोहर्रम की दस तारीख़ थी। इराक़, भारत और पाकिस्तान समेत कई देशों में 29 जुलाई को आशूरा मनाया जा रहा है।
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आशूरा के मौक़े पर भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने फिर किया इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को याद
Jul २९, २०२३ १५:१७भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आशूरा के अवसर पर पैग़म्बरे इस्लाम (स) के प्राण प्रिय नवासे और मानवता के ध्वजवाहक हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बलिदान को याद किया।
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सऊदी अरब के ऐतिहासिक क़ब्रिस्तान जन्नतुल बक़ी में हुई अज़ादारी, मां को बेटे का पुरसा देने का मिला मौक़ा, लब्बैक या हुसैन के लगे नारे! + वीडियो
Jul २९, २०२३ ११:४१सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीने में स्थित ऐतिहासिक क़ब्रिस्तान जन्नतुल बक़ी में मोहर्रम की नौ तारीख़ को ऐसी तस्वीरें सामने आई कि हर हुसैनी का कलेजा मुंह को आ गया। शबे आशूरा थी और इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के श्रद्धालु उनकी मां हज़रत फ़ातेमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा को उनके बेटे का पुरसा दे रहे थे।
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ज़बान पर या हुसैन, आंखों में आंसू, शोक में डूबा ईरान
Jul २८, २०२३ ०४:५०ईरान समेत बहुत से देशों में शुक्रवार को बड़ी श्रद्धा के साथ पैग़म्बरे इस्लाम (स) के प्राण प्रिय नवासे हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत का दिन मनाया जा रहा है।
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वीडियो रिपोर्टः हज़रत ज़ैनब के रौज़े पर पहुंचे युवा लड़कों और लड़कियों ने खाई ख़ास क़सम!
Jul २७, २०२३ १७:४८पैग़म्बरे इस्लाम (स) के प्राण प्रिय नवासे हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और उनके वफ़ादार साथियों की शहादत के शोक के दिनों में, हज़रत ज़ैनब सलामुल्लाह अलैहा का रौज़ा और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र कर्बला वालों का शोक मनाने वाले श्रद्धालुओं से भरा हुआ है ... शोक सभाओं का आयोजन करने वाली समिति के सदस्य अबू तालिब का कहना है कि इस समय दमिश्क़ में जिस तरह इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की अज़ादारी करने वाले श्रद्धालुओं का जनसैलाब है वह इस बात को साबित करता है कि 1400 साल बीत जाने के बाद भी ....