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अब समझ में आया कि कर्बला में 72 क्यों थे? क्रूर शासकों के दबाव में पहले भी इंसानियत के मददगार को अकेला छोड़ा जा चुका है
Oct १८, २०२३ १४:००इस्लाम एक ऐसा धर्म है जो किसी धर्म की बुराई करने से रोकता है। इस्लाम ने हमेशा अधर्मियों के विरुद्ध मार्चा खोला है। पवित्र क़ुरआन में अल्लाह यह आदेश देता है कि किसी के झूठे ख़ुदाओं को भी बुरा न कहो। साथ ही इस्लाम किसी भी बेगुनाह की हत्या को भी पूरी तरह इंसानियत के ख़िलाफ़ काम मानता है।
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यह कैसे वहशी जानवर हैं जो केवल बच्चों के ख़ून के प्यासे हैं? चुन-चुनकर फ़िलिस्तीनी मासूमों का नरसंहार करता इस्राईल+ वीडियो
Oct १८, २०२३ १२:१८बहुत से लोग यह सवाल करते हैं कि आख़िर फ़िलिस्तीनियों में इतना आक्रोश क्यों देखा जाता है। तो उनकी जानकारी के लिए यह बता दें कि जब माओं की गोद उजड़ती है तो ज़मीन कांप जाती है, आसमान भी ख़ून के आंसू रोता है तो फिर यह तो इंसान हैं जो अपने बच्चों के नरसंहार पर केवल अपना ग़ुस्सा ही दिखा रहे हैं। ज़रा कल्पना करके देखें कि हज़ारों की संख्या में आपके सामने बच्चों की लाशें हों और उनके क़ातिल को दुनिया शाबाशी दे रही हो।
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अगर ज़ोयोनी शासन के अपराध जारी रहे तो फिर रेज़िस्टेंस फ़ोर्सेज़ को कोई रोक नहीं पाएगा
Oct १७, २०२३ ११:५४इस्लामी इंक़ेलाब के नेता ने फ़िलिस्तीन में जारी वाक़यात को, ज़ायोनी सरकार का खुल्लम खुल्ला जुर्म और पूरी दुनिया की नज़रों के सामने खुला नस्ली सफ़ाया बताया और कहा कि हमारे अधिकारियों से बातचीत में कुछ मुल्कों के अधिकारियों का एतेराज़ यह था कि क्यों फ़िलिस्तीनियों ने ग़ैर फ़ौजियों को क़त्ल किया है?
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फ़िलिस्तीन अभी ज़िन्दा है, अलअक़्सा तूफ़ान ने बहुत सारी तस्वीरों को किया साफ़, एक झटके में नेतन्याहू का सपना हुआ चकनाचूर!
Oct १७, २०२३ १३:२४एक ओर 75 वर्षों से फ़िलिस्तीनी जनता का ख़ून बहाने वाला अवैध आतंकी शासन इस्राईल है और दूसरी ओर सात दशक पहले दर-दर भटक रहे यहूदियों को सिर छिपाने के लिए अपनी जगह देने वाले दयालु, बाहदुर, धैर्यवान और इस समय दुनिया की सबसे पीड़ित फ़िलिस्तीनी जनता है। हंसी के साथ-साथ शर्म आती है उन नेताओं, पत्रकारों और संस्थाओं पर जो फ़िलिस्तीन के संघर्षकर्ताओं को आतंकवादी और इस्राईली आतंकियों को आत्मरक्षा करने वाले सिपाही बता रहे हैं।
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मुसलमानों को बांटे रखना, दुश्मनों की सबसे बड़ी साज़िश, एकजुटता के साथ फ़िलिस्तीन की मदद का समय आ चुका है, मज़लूमों की जीत सुनिश्चित हैः सर्वोच्च नेता
Oct १५, २०२३ १०:५२इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामेनेई ने शनिवार को नाइजीरिया के लोक प्रिय इस्लामी आंदोलन के प्रमुख आयतुल्लाह शेख़ इब्राहीम ज़कज़की, उनकी धर्मपत्नी और बेटियों के साथ हुई मुलाक़ात में ग़ाज़ा की हालिया स्थिति की ओर इशारा करते हुए कहा कि फ़िलिस्तीन में हालिया दिनों में जो घटनाएं घटी हैं वही इस्लाम की शक्ति के प्रतीकों में से एक मुद्दा है।
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हिज़्बुल्लाह ने की बिस्मिल्लाह, आतंकी इस्राईली सैनिकों के ठिकानों पर हमला
Oct १५, २०२३ ०९:४९इस समय फ़िलिस्तीन और ग़ाज़ा में जो हालात हैं उसको देखकर शायद ही किसी इंसान की आंखों से आंसू न निकले। आतंकी इस्राईल के पाश्विक हमलों में दूध पीते बच्चों की शहादत की तस्वीरें देखकरा ने न्याय प्रेमी लोगों का कलेजा फट गया है। इस बीच हिज़्बुल्लाह ने आतंकी ज़ायोनी सेना के ठिकानों पर हमले शुरू कर दिए हैं।
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राष्ट्रपति रईसी ने क़तर नरेश और इराक़ के प्रधानमंत्री से टेलीफ़ोन पर की बातचीत
Oct १५, २०२३ ०७:५२इस्लामी गणराज्य ईरान के राष्ट्रपति ने फ़िलिस्तीन की हालिया स्थिति के बारे में क़तर नरेश और इराक़ के प्रधानमंत्री से टेलीफ़ोन पर बातचीत की है।
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अवैध इस्राईल के आसमान पर फिर दिखे पैराग्लाइडर, ज़ायोनी कॉलोनियों में बजे अलार्म
Oct १५, २०२३ ०६:०६पश्चिमी एशिया में अशांति की आग भड़काने वाले और मासूम फ़िलिस्तीनी बच्चों के हत्यारे अवैध ज़ायोनी शासन की आजकल नींदे उड़ हुई हैं। शनिवार देर रात उस समय ज़ायोनी कॉलोनियों में ख़तरे का अलार्म बजने लगा जब हिज़्बुल्लाह के 15 जियाले पैराग्लाइडर के ज़रिए अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन के क्षेत्र में प्रवेश कर गए।
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इस्राईल पर फिर हुई मिसाइलों की बारिश, प्रतिरोध ने तोड़ा इस्राईल और अमेरिका का अहंकार, तेलअवीव समेत कई अन्य इलाक़ों पर प्रतिरोध की जवाबी कार्यवाही
Oct १५, २०२३ ०४:५३इस्राईल द्वारा लगातार ग़ाज़ा पर किए जा रहे पाश्विक हमलों के जवाब में फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध आंदोलन हमास ने एक बार फिर अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों पर मिसाइलों से हमला किया है।
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राष्ट्र संघ को भंग कर देना ही बेहतर, फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार पर बेबस अंतर्राष्ट्रीय संगठन, ग़ाज़ा में 2200 से अधिक मौतें
Oct १४, २०२३ १४:५३इस समय इस्राईल जिस प्रकार गाज़ा पर पाश्विक हमले कर रहा है और फ़िलिस्तीनियों को नरसंहार कर रहा है उससे यह बात साफ़ हो गई है कि क्योंकि उसको अमेरिका का समर्थन हासिल है इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ केवल खेद प्रकट करने के अलावा कुछ भी नहीं कर पा रहा है।