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नाटो महासचिव के बेबुनियाद आरोपों पर ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
Jan ३१, २०२४ ०६:४६ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने क्षेत्र में इस्लामी गणतंत्र ईरान की भूमिका के बारे में नाटो के महासचिव के निराधार आरोपों और बयानों की कड़े शब्दों में निंदा की है।
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ईरान के विदेश मंत्री और संयुक्त राष्ट्र महासचिव के बीच टेलीफ़ोन पर बातचीत, ग़ज़्ज़ा के हालात पर चर्चा
Jan १६, २०२४ ०९:५५ईरान के विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव को फ़ोन करके यमन पर अमेरिका और ब्रिटेन के हमले को एक ऐसी रणनीतिक ग़लती बताया है कि जो क्षेत्र में तनाव बढ़ने का कारण बन सकती है।
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रिपोर्टः दाइश को देखकर आपको क्या लगता है? इस्लाम को आतंकवाद सो जोड़कर देखने वालों, ज़रा आंखे खोलकर सच भी देखो!
Jan ०७, २०२४ १३:०५वैसे तो इस बात में कोई शक नहीं है कि हर धर्म में किसी न किसी एक वर्ग का कट्टरवाद और चरमपंथ की ओर झुकाव हो जाता है। यह केवल इस्लाम धर्म की बात नहीं है, बल्कि दुनिया के ज़्यादातर धर्मों में कुछ इसी तरह की स्थिति पाई जाती है। लेकिन सवाल यह उठता है कि आख़िर आतंकवाद का जन्म कैसे हुआ और इसको इस्लाम धर्म से ही जोड़कर क्यों दुनिया के सामने पेश किया जाने लगा? तो इसके बहुत सारे जवाब हैं जिन सबका यहां उल्लेख नहीं किया जा सकता है। लेकिन एक दो पहलुओं को हम बयान करने का प्रयास ज़रूर करेंगे।
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इस्राईल और अमेरिका की उलटी गिनती शुरू, प्रतिरोध की जवाबी कार्यवाही में भारी तबाही
Jan ०६, २०२४ १४:५६एक ओर अमेरिका दशकों से पश्चिमी एशिया, विशेषकर इस्लामी देशों के ख़िलाफ़ साज़िशें रच रहा है और आम लोगों का नरसंहार कर रहा है वहीं उसकी नजाएज़ औलाद इस्राईल भी सात दशक से पूरे क्षेत्र की अशांति और फ़िलिस्तीनियों की नरसंहार का मुख्य कारण बना हुआ है। इस बीच ईरान के नेतृत्व वाले प्रतिरोधक बलों ने इन अत्याचारियों को सबक़ सिखाना शुरू कर दिया है और अब विशेषज्ञ यह मानने लगे हैं कि पश्चिमी एशिया में अमेरिका और उसकी नजाएज़ औलाद इस्राईल के दिन पूरे हो चुके हैं।
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अरब देशों पर मोदी की ख़ास नज़र, फ़िलिस्तीन संकट पर सऊदी क्राउन प्रिंस से भारतीय प्रधानमंत्री की वार्ता
Dec २७, २०२३ ११:५४भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बातचीत की है। दोनों नेताओं ने पश्चिमी एशिया में ग़ज़्ज़ा युद्ध की वजह पैदा हुई स्थिति के बारे में गंभीरता से चर्चा की है।
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फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ जघन्य अपराध करने वाले सभी अपराधियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिएः ईरानी राजदूत
Dec ०९, २०२३ ११:५७संयुक्त राष्ट्र में ईरान की राजदूत और उप स्थायी प्रतिनिधि ज़हरा इरशादी ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में कहा कि फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ अपराध करने वाले सभी अपराधियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। इनमें वे सभी लोग शामिल हैं जो फ़िलिस्तीन, विशेषकर ग़ज़्ज़ा में अत्याचार करने में अवैध इस्राईली शासन की मदद करते हैं।
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ईरान को अमेरिका की कड़ी चेतावनी, इससे पहले देर हो जाए इस्राईल को रोक लो!
Dec ०४, २०२३ ०७:४४ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सरकार को ग़ज़्ज़ा पट्टी और वेस्ट बैंक में रहने वाले मज़लूम फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ अवैध आतंकी इस्राईली शासन के जघन्य अपराधों के खुले समर्थन के लिए परिणाम भुगतने होंगे।
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ग़ज़्ज़ा में युद्धविराम का यूएन महासचिव ने किया स्वागत, पीड़ितों की मदद के लिए एजेंसियों ने कसी कमर
Nov २३, २०२३ ०९:५३संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने, फ़िलिस्तीनी क्षेत्र ग़ज़्ज़ा में युद्धविराम और बन्धकों की रिहाई के लिए बुधवार को हुए समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र समझौते के मानवीय प्रभाव के अधिकतम लाभ हासिल करने के लिए हर संभव मदद पहुंचाने के लिए कमर कस ली है।
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आख़िर अवैध इस्राईली शासन में ऐसा क्या है कि हज़ारों बच्चों के हत्यारे नेतन्याहू के साथ खड़ा है अमेरिका और कुछ यूरोपीय देश?
Nov १५, २०२३ १२:३२इस समय दुनिया के ज़्यादातर इंसानों के मन में एक सवाल ऐसा सवाल है कि जिसका जवाब किसी को भी नहीं मिल पा रहा है। सवाल यही है कि आख़िर पश्चिमी एशिया में मौजूद अवैध शासन इस्राईल में ऐसा क्या है कि उसके हर अपराध और विशेषकर उसके द्वारा हज़ारों बच्चों की हत्या किए जाने का बावजूद अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और कनाडा समेत कई अन्य देश उसका समर्थन करते चले आ रहे हैं। अवैध ज़ायोनी शासन का समर्थन करने के पीछे क्या उनकी मजबूरी है या फिर यह उनकी किसी साज़िशी योजना का हिस्सा है।
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हम तो डूबे हैं सनम तुमको भी ले डूबेंगे, अमेरिका के कारण गिरती संयुक्त राष्ट्र संघ की साख!
Nov १३, २०२३ १५:२९जिस प्रकार ग़ज़्ज़ा में अवैध इस्राईली शासन द्वारा अमेरिका और कुछ पश्चिमी देशों के समर्थन से सभी मानवाधिकारों और राष्ट्र संघ के प्रस्तावों को पैरों तले रौंदा जा रहा है उसको देखते हुए अब यह कहा जाने लगा है कि अमेरिका की मनमानी और उसकी वर्चस्ववादी नीतियों के कारण जिस प्रकार उसका पतन हो रहा है उसी तरह संयुक्त राष्ट्र संघ पर अमेरिका के लगातार बढ़ते प्रभाव की वजह से इस अंतर्राष्ट्रीय संस्था की साख मिट्टी में मिलती जा रही है।